बचत खाता (Saving Account) और चालू खाता (Current Account) में क्या अंतर है?
बैंक में खाता खुलवाते समय यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है कि आपकी जरूरतों के हिसाब से कौन सा खाता सबसे बेहतर है।
जब आप बैंक में जाते है यो सबसे पहले यही सवाल होता है कि कौन से प्रकार का खाता खोलना है , और जवाब के हिसाब से आपको खाता खोलने का फॉर्म दिया जाता है , वैसे तो बैंकों के अपने अलग अलग प्रकार के अकाउंट होते है , जिनके नाम अलग अलग होते है , परन्तु मुख्य रूप से दो प्रकार के अकाउंट होते है , आइए, इन दोनों के बीच के मुख्य अंतर को विस्तार से समझते हैं:
1. बचत खाता (Saving Account) क्या है?
बचत खाता मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है जो अपनी मेहनत की कमाई का कुछ हिस्सा बचाना चाहते हैं और उस पर थोड़ा ब्याज (Interest) भी पाना चाहते हैं। आम तौर पर लोग सेविंग अकाउंट ही जानते है , क्योंकि करेंट अकाउंट की संख्या कम होती है । अगर आप सिर्फ बैंक में पैसा रखने के लिए खाता खोल रहे है तो वो सेविंग अकाउंट ही होता है । किसी बैंक से कोई लोन लेना हो या पैसा डिपॉजिट करना हो सबसे पहले बचत खाता ही खोला जाता है ।
ये खाता कौन कौन खुलवा सकता है ? आइए जानते है :- नौकरीपेशा लोग, छात्र, पेंशनभोगी और आम नागरिक, पहली बार कोई आदमी बैंक में खाता खोलता है वो सेविंग अकाउंट ही होता है |
ब्याज (Interest) कितना मिलता है :
बैंक इस खाते में जमा राशि पर आपको ब्याज देता है (आमतौर पर 2.5% से 4% तक)। अलग अलग बैंकों में अलग अलग ब्याज होता है , जो पैसा आप बैंक में रखते है , उस पर बैंक आपको उसके ब्याज के अनुसार पैसा देता है |
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, बैंक बचत खाते के बैलेंस पर प्रतिदिन के हिसाब से ब्याज की गणना (Calculate) करते हैं।
लेकिन इसे ग्राहकों के खाते में ट्रांसफर या जमा करने का नियम निम्नलिखित प्रकार से होता है:
बैंक सेविंग अकाउंट का ब्याज हर 3 महीने (त्रैमासिक) पर खाते में जमा करते हैं।
वित्तीय वर्ष के अनुसार ये महीने आमतौर पर जून, सितंबर, दिसंबर और मार्च के अंत में या अगले महीने की शुरुआत में (जैसे 30 जून, 30 सितंबर, 31 दिसंबर और 31 मार्च के बाद) होते हैं।
कुछ बैंक या विशेष खाते ऐसे भी हो सकते हैं जिनमें ब्याज मासिक (Monthly) या अर्ध-वार्षिक (Half-yearly) आधार पर भी क्रेडिट किया जाता है, हालांकि अधिकांश बैंक त्रैमासिक विकल्प का ही पालन करते हैं।
आपका बैंक सेविंग अकाउंट में कब ब्याज देता है जरूर पता लगाये |
क्या आप जानते है ?
सेविंग अकाउंट का शुरुआती रूप ब्रिटेन और यूरोप में देखने को मिलता है।
* 17वीं और 18वीं शताब्दी में गरीबों और मजदूरों के लिए पैसे बचाने का कोई सुरक्षित जरिया नहीं था। इस समस्या को दूर करने के लिए सबसे पहले चैरिटी बैंक (Charity Banks) और म्यूचुअल सेविंग बैंक (Mutual Savings Banks) की स्थापना की गई।
* दुनिया के पहले रिकॉग्नाइज्ड सेविंग बैंकों में से एक की शुरुआत 1810 में स्कॉटलैंड के रेवरेंड हेनरी डंकन (Rev. Henry Duncan) ने रूतवेल (Ruthwell) में की थी, जिसका उद्देश्य गरीब वर्ग को बचत के लिए प्रेरित करना था।
औपचारिक शुरुआत और कानूनी मान्यता
* धीरे-धीरे इस अवधारणा को सरकारों और बड़े बैंकों ने अपनाया। 1861 में यूनाइटेड किंगडम में पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक (Post Office Savings Bank) की शुरुआत हुई, जिससे आम जनता के लिए डाकघरों के माध्यम से पैसे जमा करना बेहद आसान और सुरक्षित हो गया।
सेविंग अकाउंट में लेन-देन की सीमा कितनी होती है :
ये अकाउंट कई प्रकार के होते , जिसमें अलग अलग सीमा तय होती है , जैसे जनधन खाता : उसमें पैसे रखने और निकलने की सीमा बहुत सीमित होती है , आप एक निश्चित सीमा तक ही पैसे निकाल या जमा कर सकते हैं। ज्यादा लेन-देन करने पर बैंक शुल्क लगा सकता है। खाता खोलने से पहले ये अवश्य जान ले कि आप अपने खाते में कितन लें दें कर सकते है
न्यूनतम राशि (Minimum Balance) कितना होता है :
इसमें कुछ खाते ज़ीरो बैलेंस होते है मतलब आपको इसमें कोई minimum balance रखने की जरूरत नहीं होती है , और कुछ प्रकार में बैलेंस होना आवश्यक है , नहीं तो बैंक उसके लिए मिनिमम बैलेंस चार्ज कर सकता है | खाता खोलने से पहले यह जानकारी अवश्य जान ले कि कितना पैसा खाता में कम से कम होना चाहिए , ताकि आप पैनल्टी से बच सके : , क्या आप जानते है आपके खाते में कितन मिनिमम बैलेंस होना चाहिए ?
इस खाते में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की शर्त काफी सरल होती है, जिससे इसे कोई भी आसानी से रख सकता है।
क्या आप जानते है ?
भारत में सेविंग अकाउंट की शुरुआत:
भारत में आधुनिक बैंकिंग की शुरुआत अंग्रेजों के समय हुई थी। भारत का पहला सेविंग बैंक
प्रेसीडेंसी बैंक (Presidency Bank) के तहत शुरू हुआ था।
बाद में सन 1882 में भारत में पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक की शुरुआत की गई, जिसने देश के दूर-दराज के इलाकों में आम लोगों तक बचत खाते की पहुंच को बहुत आसान बना दिया।
इसे "सेविंग अकाउंट" नाम कैसे पड़ा?
इस नाम के पीछे इसका मुख्य उद्देश्य और कार्यप्रणाली (Purpose & Function) छिपी है:
बचत (Savings) का उद्देश्य:शुरुआती दौर में ऐसे बैंक खाते उन लोगों के लिए डिजाइन किए गए थे जो अपनी नियमित आय (Income) में से कुछ हिस्सा भविष्य के लिए बचाकर (Save करके) सुरक्षित रखना चाहते थे।
बैंक पासबुक क्या होता है ?
आपका खाता खुलने के बाद बैंक आपको पासबुक देता है , जिसमें आपके खाते से जुड़ी सभी जानकारी होती है |
किसी भी बैंक पासबुक का मुख्य उद्देश्य खाताधारक के लेन-देन (Transactions) और खाते के बैलेंस का रिकॉर्ड रखना होता है। आमतौर पर एक बैंक पासबुक में निम्नलिखित मुख्य विवरण और पृष्ठ होते हैं:
1. पहला पृष्ठ (Front Page / Account Details)
पासबुक का पहला पन्ना बहुत महत्वपूर्ण होता है, जिसमें बैंक खाते से जुड़ी सारी मुख्य जानकारियां मुद्रित (Printed) होती हैं:
बैंक और शाखा का नाम: (Bank & Branch Name) और उसका IFSC कोड व MICR कोड।
खाताधारक का विवरण: (Account Holder's Name), पूरा पता (Address) और संपर्क नंबर।
खाता संख्या: (Account Number) और खाते का प्रकार (जैसे- Savings Bank Account या BSBD Account)।
कस्टमर आईडी: ( CIF / Customer ID) और फोटो (जो बैंक द्वारा सत्यापित होती है)।
2. लेन-देन का विवरण (Transactions Statement Page)
पासबुक के अंदर के पन्नों पर बैंक में हुए पैसों के लेन-देन का पूरा लेखा-जोखा होता है |
हमने सेविंग खाता के बारे में कुछ जानकारी ली , खाता खोलने के लिए जब आप बैंक जाते है तो सबसे पहले आपको अकाउंट ओपनिंग फॉर्म दिया जाता है , फॉर्म भरकर , केवाईसी के साथ जमा करना होता है , तब कुछ दिनों में आपको पासबुक मिल जाता है |
इस लेख में हमने बचत खाता के बारे में कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की , भविष्य में हम सेविंग अकाउंट के अलग अलग प्रकार के बारे में जानने का प्रयास करेंगे , और खाता खोलने के लिए कौन कौन से डाक्यूमेंट लगते है उसकी चर्चा करेंगे |
मैं आशा करता हु के आपको यह लेख पसंद आया होगा |
धन्यवाद |

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