RD (Recurring Deposit) रिकरिंग डिपॉज़िट क्या है ?

 RD  (Recurring Deposit) रिकरिंग डिपॉज़िट

Rd
RD benefits


रिकरिंग डिपॉज़िट (Recurring Deposit, संक्षेप में RD) बैंकिंग और पोस्ट ऑफिस की एक बेहद लोकप्रिय बचत योजना है। यह उन लोगों के लिए सबसे उत्तम विकल्प है जो एकमुश्त (Lump sum) बड़ी रकम निवेश नहीं कर सकते, लेकिन हर महीने छोटी-छोटी बचत करके एक बड़ा फंड तैयार करना चाहते हैं।  रिकरिंग मतलब थोड़ा थोड़ा होता है , इसमें आप थोड़ा थोड़ा पैसा हर महीने डाल सकते है |  पिछले लेखों में हमने बचत खाता , चालू खाता , Fixed Deposit और पीपीएफ के बारे में भी समझा  इससे पहले  के लेख आपको पढ़ने है तो यहां क्लिक कर बचत खाता, चालू खाता, फिक्स्ड डिपॉजिट, पीपीएफ  के बारे में जान सकते है , अब आइए  रिकरिंग डिपॉज़िट के विषय में चर्चा करते है |

RD में सब कुछ fd की तरह ही होता है , INTEREST पहले से फिक्स होता है , Rd कितने साल की होगी वो भी तय होता है , आप हर महीने कितना पैसा डालेंगे वो भी तय होता है , और मैचुरिटी पर आपको पैसा INTEREST के साथ वापस मिल जाता है , इसको समझने से पहले fd  से संबंधित लेख अवश्य पढ़ ले , आइए अब विस्तार से चर्चा करते है |

आरडी (RD) की मुख्य विशेषताएं

नियमित मासिक बचत: 

इसमें हर महीने एक निश्चित तारीख को तयशुदा राशि (जैसे ₹500, ₹1,000 या उससे अधिक) जमा करनी होती है। आप इसमें हर महीने अपने सुविधानुसार पैसा जमा कर सकते है |जैसे Fd में आपको एक बार में पैसा जमा करना होता है , वैसे यहां नहीं होता , आप अपने बचत अनुसार , हर महीने 100,200,500, 1000 या 5000 या और आप जितना चाहे जमा कर सकते है | सबसे बड़ा फायदा यही है कि थोड़ा थोड़ा पैसा जमा हो जाता है हर  महीने और आपको एक बार मैचुरिटी में ज्यादा  पैसा मिलता है |

निवेश की अवधि: 

आरडी की सामान्य अवधि 6 महीने से लेकर 10 साल तक हो सकती है। आप अपनी वित्तीय आवश्यकता के अनुसार अवधि चुन सकते हैं।  अलग अलग बैंकों में इसमें थोड़े बदलाव हो सकते है , आप RD खोलने से पहले अवश्य जान ले अवधि के बारे में | अपने बैंक से  जानकारी प्राप्त कर ले कि उनके पास कितने कितने  महीने की रिकरिंग डिपॉजिट स्कीम  उपलब्ध है |

ब्याज दरें: 

इस पर मिलने वाला ब्याज आमतौर पर साधारण बचत खाते (Savings Account) से काफी अधिक होता है और यह लगभग फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के समान ही होता है। जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है RD  में सब कुछ FD की तरह ही होता है , ब्याज दोनों का  समान ही होता है , बस इसमें आप जितना पैसा डालते  जाएगे उस पर आपको ब्याज मिलता रहेगा  |आरडी पर मिलने वाले ब्याज की गणना हर तिमाही (Quarterly Compound) आधार पर की जाती है, जिससे कुल रिटर्न बढ़ जाता है। मतलब आपके ब्याज  की गणना साल में 4 बार होती है , जितना पैसा आपके RD अकाउंट में उस समय होता है , जैसे जैसे  आपका पैसा बढ़ता   है ,  ब्याज बढ़ता  जाता है |


क्या आप  जानते है ?

रिकरिंग डिपॉजिट (Recurring Deposit - RD) का इतिहास बैंकिंग सुधारों, वित्तीय समावेशन और आम जनता में बचत की आदत डालने की जरूरत से जुड़ा हुआ है। 

 शुरुआती दौर में पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली मुख्य रूप से अमीर या बड़े व्यापारियों के लिए हुआ करती थी, जहाँ फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या एकमुश्त निवेश का चलन था। लेकिन छोटे वेतनभोगियों, किसानों और मध्यम वर्ग के लिए हर महीने एक तय छोटी रकम बचाना ही संभव था। इस जरूरत को पूरा करने के लिए दुनिया भर में (विशेषकर ब्रिटिशकालीन भारत और सहकारी बैंकिंग मॉडल में) रिकरिंग/किस्तों वाली जमा योजनाओं की रूपरेखा तैयार की गई।

 भारत में डाकघर (Post Office) और बैंकों की भूमिका

भारत में औपचारिक वित्तीय पहुंच बढ़ाने के लिए सरकार और बैंकों ने ऐसी योजनाएं शुरू की  जो छोटे निवेशकों को आकर्षित कर सकें। आजादी के बाद और खासकर 1960-70 के दशक के राष्ट्रीयकरण के बाद, भारतीय बैंकों ने घर-घर तक बैंकिंग पहुंचाने के लिए RD को एक प्रमुख टूल बनाया। इसके अलावा, भारत सरकार के डाक विभाग (India Post) ने  'नेशनल सेविंग्स रिकरिंग डिपॉजिट'  के जरिए देश के दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों तक इसे पहुंचाया, जहां बैंक आसानी से उपलब्ध नहीं थे।

 आर्थिक सुधार (1991) के बाद का बदलाव:

 1991 के उदारीकरण (Liberalization) के बाद भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ी। इस दौरान बैंकों ने RD पर आकर्षक ब्याज दरों की पेशकश की, जिससे यह मध्यम वर्ग के लिए बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर खरीदने जैसे लक्ष्यों को पूरा करने का सबसे लोकप्रिय और सुरक्षित जरिया बन गया।आज भी यह खाता काफी लोकप्रिय है ।


आरडी (RD) के प्रमुख लाभ

 1. हर महीने पैसे जमा करने की बाध्यता के कारण लोगों में बचत करने की अच्छी आदत विकसित होती है। आप धीरे धीरे हर  महीने पैसा बचाना सिख जाते है |

 2.  बाज़ार के उतार-चढ़ाव (Market Risks) से पूरी तरह मुक्त है, इसलिए इसमें आपका मूलधन और रिटर्न पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। बैंक द्वारा जितना पैसा आपको बताया जाता है उतना पैसा आपको मिलता है इंटरेस्ट के साथ |

 3. यदि आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो कई बैंक और वित्तीय संस्थान आरडी में जमा राशि के आधार पर 90% से 95% तक लोन या ओवरड्राफ्ट की सुविधा देते हैं। जैसे आपको FD में लोन की सुविधा थी , यहां भी आपको लोन की सुविधा प्राप्त होती है |इसकी पूरी जानकारी आप अपने बैंक से प्राप्त कर सकते है ।

 4. आप बहुत ही कम राशि (बैंक के अनुसार न्यूनतम ₹100) से अपना आरडी खाता शुरू कर सकते हैं। FD के लिए अधिक पैसे की आवश्यकता थी, RD में आप थोड़ा थोड़ा हर महीने जमा कर सकते है |

आरडी खाता कौन खोल सकता है?

 * कोई भी भारतीय नागरिक व्यक्तिगत रूप से या संयुक्त (Joint) नाम से यह खाता खोल सकता है।

 * माता-पिता नाबालिग (Minor) बच्चों के नाम पर भी आरडी खाता संचालित कर सकते हैं।

 * वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) के लिए बैंक सामान्य नागरिकों की तुलना में थोड़ी अधिक ब्याज दर प्रदान करते हैं।

और अच्छे से समझने के लिए  नीचे एक चार्ट दिया जा रहा है जब आप  हर महीने 1000/- जमा करते है ५ साल और सालाना दर 7 percent है तो आपको कितना पैसा मिलेगा आइए देखते है ।

Rd chart

आप अपने बैंक में जाकर RD अकाउंट खोल सकते है , या ऑनलाइन भी अपने इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग के माध्यम से घर बैठे अकाउंट खोल सकते है , आज लगभग सभी बैंक यह सुविधा प्रदान करते है | इस लेख के  माध्यम से हमने RD अकाउंट से संबंधित विषयों पर चर्चा की , कोई भी RD खोलने से पहले उसके बारे में जानकारी अवश्य प्राप्त कर ले , इसका एक फायदा यह भी है कि , जब interest रेट ज्यादा हो तब RD खुलवा ले , तो आपको वही इंटरेस्ट जब तक RD रहेगी तब तक मिलता रहेगा | मै आशा करता हु कि  आपने इस लेख से जानकारी अवश्य ग्रहण की होगी | यह लेख पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद |

धन्यवाद |


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