आधिकारिक रूप से मान्य दस्तावेज़ (Officially Valid Documents - OVDs)
वर्ष 2002 से पहले भारत में बैंक खाता खोलना वर्तमान समय की तुलना में काफी सरल और लचीला था। उस समय सख्त 'KYC' (Know Your Customer) नियम या अनिवार्य "Officially Valid Documents" (OVDs) का वह कड़ा ढांचा नहीं था जो आज है।
उस दौर में बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया मुख्य रूप से निम्नलिखित तरीकों से होती थी:
परिचयकर्ता (Introducer System - सबसे मुख्य तरीका)
2002 से पहले बैंक खाता खोलने के लिए किसी कानूनी आईडी से ज्यादा "परिचय" (Introduction) पर भरोसा किया जाता था। बैंक खाता खोलने के लिए यह नियम था कि नया खाता खुलवाने वाले व्यक्ति को बैंक के किसी पुराने या मौजूदा ग्राहक द्वारा प्रमाणित (Introduce) कराना पड़ता था। फॉर्म पर उस पुराने ग्राहक के हस्ताक्षर होते थे, जो यह गारंटी देता था कि वह इस नए व्यक्ति को जानता है और उसका पता सही है।
बैंक अधिकारी भी स्थानीय स्तर पर ग्राहकों को जानते थे, इसलिए आपसी भरोसे के आधार पर खाते खुल जाते थे। 2002 से पहले ID के लिए कोई नियम नहीं था , PANCARD का इस्तेमाल बड़े ट्रांजेक्शन के लिए होता था , उसकी भी बैंक में खाता खोलने के लिए कोई अनिवार्यता नहीं थी | उस समय बहुत कम लोग खाता खुलवाते थे , और फॉर्म बहुत साधारण होते थे |
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| Old sample form |
PMLA (Prevention of Money Laundering Act) को मुख्य रूप से वित्तीय प्रणाली को अपराधियों द्वारा "मनी लॉन्ड्रिंग" (काले धन को सफेद करने) के हथियार के रूप में इस्तेमाल होने से रोकने के लिए शुरू किया गया था।
PMLA (Prevention of Money Laundering Act, 2002) यानी धन शोधन निवारण अधिनियम को मुख्य रूप से देश की वित्तीय व्यवस्था को सुरक्षित रखने और अवैध रूप से कमाए गए काले धन को सफेद करने (Money Laundering) की प्रक्रिया पर लगाम लगाने के लिए शुरू किया गया था। संसद द्वारा इसे जनवरी 2003 में पारित किया गया था और यह 1 जुलाई 2005 से देश में प्रभावी हुआ।
अनिवार्य केवाईसी (KYC - Know Your Customer)
PMLA के नियमों के तहत ही बैंकों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे खाता खोलते समय ग्राहक की पहचान की पुष्टि करें (जैसे पैन कार्ड, आधार कार्ड और आधिकारिक रूप से वैध दस्तावेज)। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी व्यक्ति फर्जी पहचान या बेनामी नाम से खाता न खोल सके। KYC के बारे में हम आगे के लेखों में विस्तार से चर्चा करेंगे |
इन दस्तावेज़ों का मुख्य उपयोग किसी व्यक्ति की पहचान (Identity) और पते (Address) को सत्यापित करने के लिए किया जाता है। बैंक खाता खोलने, वित्तीय सेवाएँ लेने या किसी भी तरह का KYC (नो योर कस्टमर) सत्यापन पूरा करने के लिए इनमें से कम से कम एक दस्तावेज़ देना अनिवार्य होता है।
आधिकारिक रूप से मान्य दस्तावेज़ों (OVDs) की सूची
व्यक्तियों के लिए, भारतीय सरकार और वित्तीय संस्थान निम्नलिखित छह दस्तावेज़ों को प्राथमिक OVD के रूप में स्वीकार करते हैं:
1. पासपोर्ट (Passport)
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। यह पहचान और पता दोनों के प्रमाण के रूप में कार्य करता है। इसकी वैलिडिटी होती है अवश्य ध्यान रखें |
2. ड्राइविंग लाइसेंस (Driving Licence)
संबंधित राज्य परिवहन प्राधिकरण (RTO) द्वारा जारी किया जाता है। इसमें फोटो, हस्ताक्षर, जन्म तिथि और वर्तमान पता होता है।
3. आधार संख्या की उपस्थिति का प्रमाण (Proof of Possession of Aadhar Number)
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा जारी किया जाता है। इसे आधार पत्र, ई-आधार (आधिकारिक UIDAI वेबसाइट से डाउनलोड किया गया), आधार सुरक्षित QR कोड, या आधार पेपरलेस ऑफलाइन ई-केवाईसी के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। आज के समय में खाता खोलने के लिए मुख्य रूप से आधार और पैन कार्ड से काम हो जाता है , यहां ध्यान रखें कि आपके आधार कार्ड का पता वही हो जहां आप रहते है नहीं, तो कोई और एड्रेस प्रूफ देना होगा |
4. मतदाता पहचान पत्र (Voter’s Identity Card)
विवरण:भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किया जाता है। यह मतदान के योग्य नागरिकों की पहचान और पते का सत्यापन करता है।
5. नरेगा (NREGA) द्वारा जारी जॉब कार्ड
विवरण:महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत जारी किया जाता है, जिस पर राज्य सरकार के अधिकारी के हस्ताक्षर होने अनिवार्य हैं।
6. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) द्वारा जारी पत्र
इसमें व्यक्ति के नाम और पते से संबंधित विवरण होते हैं।
डीम्ड OVDs (केवल पते के प्रमाण के लिए)
यदि आपके प्राथमिक OVD (जैसे आधार या ड्राइविंग लाइसेंस) में आपका अपडेटेड/वर्तमान पता नहीं है , तो नियम विशेष रूप से पते के प्रमाण के लिए डीम्ड OVDs जमा करने की अनुमति देते हैं।
नोट: जब आप डीम्ड OVD जमा करते हैं, तो आम तौर पर आपको 3 महीने के भीतर अपना वर्तमान पता दर्शाने वाला अपडेटेड प्राथमिक OVD जमा करना आवश्यक होता है।*
स्वीकृत डीम्ड OVDs में शामिल हैं:
उपयोगिता बिल (Utility Bills): 2 महीने से अधिक पुराने नहीं होने चाहिए (बिजली, टेलीफोन, पोस्ट-पेड मोबाइल, पाइप्ड गैस या पानी का बिल)।
संपत्ति या नगर निगम कर रसीद (Property or Municipal Tax Receipt)।
पेंशन या पारिवारिक पेंशन भुगतान आदेश (PPOs): सरकारी विभागों या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) द्वारा सेवानिवृत्त कर्मचारियों को जारी किए गए, बशर्ते उन पर पता दर्ज हो।
आवास के आवंटन पत्र (Allotment Letters of Accommodation): केंद्र/राज्य सरकार के विभागों, वैधानिक निकायों, नियामक निकायों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों, वित्तीय संस्थानों और सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा जारी किए गए—साथ ही आधिकारिक लीव और लाइसेंस समझौते।
OVDs पर नाम परिवर्तन से जुड़े नियम
यदि किसी व्यक्ति ने OVD जारी होने के बाद कानूनी रूप से अपना नाम बदल लिया है (आमतौर पर शादी के बाद), तो वह दस्तावेज़ तब भी मान्य रहता है जब उसके साथ निम्नलिखित कानूनी प्रमाण संलग्न किए जाएं:
राज्य सरकार द्वारा जारी विवाह प्रमाण पत्र (Marriage Certificate)**।
नाम परिवर्तन का उल्लेख करने वाली आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना (Gazette Notification) ।
हमने यहां सभी OVDS की चर्चा की , पर क्या आपने देखा इस लिस्ट में पैन कार्ड नहीं है , आज के समय में मुख्य रूप में बैंक में पैन कार्ड और आधार कार्ड मांगा जाता है , और किसी दस्तावेज के जरूरत तभी पड़ती है जब आपका आधार कार्ड का पता अलग हो, तो आपको कोई दूसरा एड्रेस प्रूफ जमा करना पड़ता है | कुछ और भी डॉक्यूमेंट्स होते है जिनकी हम बाद में चर्चा करेंगे | आइए पहले जानते है हम पैनकार्ड के विषय में |
PAN CARD (पैनकार्ड)
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, पैन कार्ड (PAN Card) को बैंक खाता खोलते समय पहचान और टैक्स अनुपालन के लिए एक मुख्य दस्तावेज के रूप में लिया जाता है, लेकिन तकनीकी रूप से यह आरबीआई की OVD (Officially Valid Documents - आधिकारिक रूप से मान्य दस्तावेज) की उस मुख्य सूची में शामिल नहीं है जिसे विशेष रूप से 'पते के प्रमाण' (Proof of Address) के लिए अनिवार्य माना जाता है।
इसे इस तरह से समझें:
- RBI के नियमों के तहत पते और पहचान के लिए मुख्य OVD में आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, नरेगा (NREGA) जॉब कार्ड और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) का पत्र आते हैं | जिसकी हमने विस्तार से चर्चा की है|
- पैन कार्ड एक अनिवार्य Permanent Account Number (PAN) दस्तावेज है जो वित्तीय लेन-देन, टैक्स और वित्तीय पहचान के लिए जरूरी है। चूंकि पैन कार्ड पर आमतौर पर पूरा स्थायी पता मुद्रित (Printed) नहीं होता है, इसलिए बैंक इसे केवल पते के प्रमाण (Address Proof) के रूप में स्वीकार नहीं करते हैं। लेकिन लेन देन के लिए पैन कार्ड एक अनिवार्य डॉक्यूमेंट है और पहचान के लिए ID की तरह इस्तेमाल होता है |
