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(SCSS)सीनियर सिटीज़न सेविंग स्कीम

सीनियर सिटीज़न सेविंग स्कीम (SCSS): वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित निवेश और शानदार रिटर्न


SCSS benefits
Benefits of SCSS


सीनियर सिटीज़न सेविंग स्कीम (SCSS) भारत सरकार की एक बेहद लोकप्रिय और सुरक्षित छोटी बचत योजना है, जो विशेष रूप से सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) और वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाई गई है। आज के समय में कहा जाए कि सरकारी बैंक FD  पर कितना इंटरेस्ट देते है , तो आप कहेंगे कि ज्यादा से ज्यादा 7% , पर उसके विपरीत सिर्फ SCSS  ही एक एडी स्कीम है जो सबसे ज्यादा ब्याज  देती  8.20%  इंटरेस्ट  देता है , इस तरह यह सबसे ज्यादा ब्याज देने वाली  SCHEME  कह सकते है । यह भारत सरकार द्वारा मुख्य रूप से ६० साल के ऊपर के लोगों के लिए  बनाया गया है , ताकि आप  रिटायर होने के बाद अपना पैसा सुरक्षित , और ज्यादा ब्याज के साथ रख सके । पिछले लेखों में हमने FD , RD, और  PPF के बारे में विस्तार से जाना , PPF भी  एक सरकारी योजना है सबके लिए । अगर आप  इनके   बारे में पढ़ना चाहते है तो यहां PPF , FDR, RD पर  CLICK  कर के पढ़ सकते है , उसके बाद आप SCSS को भी अच्छे से समझ पाएंगे ।  आइए अब हम इसे और अच्छे तरीके से समझने का प्रयास करते है ।

क्या आप जानते है ?

SCSS के आने से पहले बुजुर्गों के लिए 'Senior Citizens Deposit Scheme, 1993' जैसी कुछ अन्य योजनाएं थीं। सरकार ने पुरानी व्यवस्थाओं को और अधिक आकर्षक, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए इस नई और उन्नत योजना को पेश किया।

Senior Citizen Savings Scheme (SCSS) की शुरुआत भारत सरकार द्वारा वर्ष 2004 में की गई थी। 2004 में इसे लाया गया था ।

इस योजना को शुरू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य देश के वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) को रिटायरमेंट के बाद एक सुरक्षित, निश्चित और नियमित आय (Regular Income) का स्रोत प्रदान करना था।

इसे भारत सरकार के पोस्ट ऑफिस सेविंग्स नेटवर्क (India Post) और अधिकृत कमर्शियल बैंकों के माध्यम से लॉन्च किया गया था, ताकि देश के बुजुर्ग आसानी से इसका लाभ उठा सकें।

 सबसे पहले  अगर आप रिटायरमेंट के बाद किसी से  , पूछते है कि पैसा कहा इन्वेस्ट करना  है  ? तो , यह जवाब अवश्य आता है कि SCSS , इस योजना के  बहुत सारे फायदे है , और यह वरिष्ठ नागरिकों में  बहुत लोकप्रिय है , अब हम  इस योजना से जुड़ी मुख्य  बातों पर चर्चा करेंगे :

ब्याज  कितना मिलेगा ?

सबसे पहला  सवाल होता है , ब्याज कितना है ? वर्तमान  मतलब अगस्त , 2026 में इस योजना पर 8.2% प्रति वर्ष की दर से ब्याज मिल रहा है, जिसकी समीक्षा सरकार द्वारा हर तिमाही (Quarterly)  या हर तीन महीने में की जाती है। एक बार खाता खुलने पर यह ब्याज दर पूरे कार्यकाल (5 साल) के लिए लॉक हो जाती है। मतलब अगर बीच में बदल भी जाए तो आपका ब्याज दर 8.20 % ही रहेगा 5 साल तक ।

क्या आप जानते है ?

अगस्त 2004 में जब योजना शुरू हुई, तब से लेकर मार्च 2012 तक ब्याज दर 9.0% पर स्थिर रही थी ।

2012-13: 9.30%

2013-2015: 9.20%

2015-2016: बढ़ाकर फिर से 9.3% कर दी गई थी ।

सरकार ने तिमाही समीक्षा के आधार पर दरों में धीरे-धीरे कटौती करना शुरू किया। वर्ष 2016 से 2019 के बीच यह दर घटकर 8.3% से 8.7% के बीच रही।

इसके बाद वर्ष 2020 की शुरुआत में यह घटकर 8.6% और फिर कोविड काल के दौरान गिरकर सीधे 7.4% पर आ गई 

ब्याज दरों में सुधार हुआ और यह बढ़कर 7.4% से 7.6% और फिर 8.0% तक पहुँची ।

अप्रैल 2023 से यह दर स्थिर रूप से 8.2% पर बनी हुई है और वर्तमान तिमाही में भी यही लागू है।

अधिकतम ब्याज दर  9.30%  और न्यूनतम ब्याज दर 7.40 %  तक गई  है । इससे आप जान सकते है कि समय के साथ उतार - चढ़ाव  समय समय पर होता रहता है , लेकिन एक बार आप जिस समय SCSS में पैसा जमा करते है , वही ब्याज 5 साल तक रहता है ?

ब्याज  कैसे मिलेगा  ?

इसका ब्याज हर तिमाही (हर 3 महीने में - अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी के पहले दिन) सीधे निवेशक के बैंक खाते में जमा किया जाता है। इसका ब्याज आप  अपने बचत खाता में ले सकते है । इसमें एक बात ध्यान रखे , मान लीजिए आप ने खाता 1  मार्च को   खोला तो , आपका पहला  ब्याज  अप्रैल में जमा होगा 1 तारीख को , लेकिन वो ३ महीने का नहीं बल्कि 1 महीने का होगा  क्योंकि आपने SCSS  में पैसा  ब्याज मिलने की तारीख से एक महीने पहले खोला है ,ब्याज मिलने का महीने और तारीख का समय हमेशा एक ही रहता है ,  उसके बाद फिर अगला जुलाई में और 3-3 महीने पर जमा होता रहेगा  । मतलब आप जब भी पैसा जमा करते है , तो सबसे पहले ब्याज आपको अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी के 1 तारीख को मिलेगा , आपने जब खाता खोला उसके आधार पर , उसके बाद हर 3 महीने में मिलता रहेगा |

कितने दिन के लिए जमा  होता है ?

इस योजना का मैच्योरिटी पीरियड 5 वर्ष है। इसे पूरा होने के बाद एक बार में केवल 3 साल के लिए और बढ़ाया जा सकता है। ५ साल का term period होता है , उसके बाद केवल एक बार ३ साल के लिए बढ़ा सकते है  फिर मैच्योर हो जाता है।, लेकिन फिर से आप ५ साल के लिए नया कर सकते है । मतलब कम से कम 5 साल तक रखा जा सकता है |

कितना जमा कर सकते है ?

 न्यूनतम निवेश: ₹1,000

 अधिकतम निवेश: ₹30 लाख (व्यक्तिगत या संयुक्त खाते में)

पहले इसमें  1500000/-  ही जमा किए जा सकते थे , अब बढ़ाकर  3000000/ कर दिया गया है , संयुक्त मतलब अलग अलग बैंक के  मिलाकर टोटल  रकम 3000000/- से ज्यादा नहीं हो सकती । आपके पास अगर  1000/- भी है तो आप SCSS  में जमा कर सकते है | एक बात ध्यान  रखने की है कि अलग अलग बैंक , मतलब आप दो अलग  अलग बैंकों में 1500000/- और 1500000/- रख सकते है |

कौन SCSS   खाता खोल  सकता है ?

कोई भी  60 वर्ष या उससे अधिक आयु का  भारतीय नागरिक। 

55 से 60 वर्ष की आयु के वे कर्मचारी जो वीआरएस (VRS) या सुपरएनुएशन ले चुके हैं (बशर्ते रिटायरमेंट लाभ मिलने के 1 महीने के भीतर खाता खोला गया हो)। आपको रिटायरमेंट का डॉक्यूमेंट बैंक में दिखाना होता है और आपके रिटायरमेंट के एक महीने के भीतर ये खाता अवश्य खोल ले |

रक्षा सेवा (Defense) से रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए आयु सीमा 50 वर्ष है। यहां भी आपको डॉक्यूमेंट दिखाना होता है , तब बैंक आपका SCSS चालू कर देता है । रिटायर होने के तुरंत बाद अवश्य SCSS में पैसा जमा कर दे, नहीं तो फिर 60 साल तक इंतजार करना पड़ेगा |

कौन SCSS नहीं कर सकता हैं ?

हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) और एनआरआई (NRI) इस योजना के पात्र नहीं हैं।

जिसकी आयु ६० साल से कम हो , वह SCSS में पैसा जमा नहीं कर सकता। 

क्या ज्वाइंट अकाउंट  खोला जा सकता है ?

हां, सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) के तहत ज्वॉइंट अकाउंट खोला जा सकता है, लेकिन इसके कुछ विशेष नियम हैं:
 1.  SCSS में आप केवल अपने   पति या पत्नी (Spouse)  के साथ ही ज्वॉइंट अकाउंट खोल सकते हैं। अन्य किसी रिश्तेदार या व्यक्ति के साथ ज्वॉइंट खाता खोलने की अनुमति नहीं है।
 2.   ज्वॉइंट अकाउंट में मुख्य या पहला नाम उसी व्यक्ति का होना चाहिए जो SCSS की पात्रता (जैसे 60 वर्ष या उससे अधिक की आयु, या तय नियमों के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारी) को पूरा करता हो।
 3.  ज्वॉइंट खाते में जमा की जाने वाली पूरी राशि केवल  पहले खाताधारक   की ही मानी जाती है।
 4.  खाताधारक की आयु 60 वर्ष होने पर, यदि उनके जीवनसाथी की आयु 60 वर्ष से कम भी है, तब भी उन्हें ज्वॉइंट होल्डर बनाया जा सकता है।

कर लाभ (Tax Benefits):

इस योजना में आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत  सिर्फ ₹1.5 लाख तक के निवेश पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है। मतलब आप इसमें कितना भी पैसा डाले 150000/- के ऊपर लेकिन आपको छूट सिर्फ 150000/-  तक ही मिलेगी उस साल में |

इस  पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह कर योग्य (Taxable) है,  जो भी ब्याज मिलेगा उसपर आपको टैक्स देना होगा | एक वित्तीय वर्ष में ब्याज ₹50,000 से अधिक होने पर टीडीएस (TDS) कट सकता है। मतलब अगर आप  600000/ के ऊपर पैसा जमा करते है तो TDS कटेगा। जिसे आप बाद में ITR भर कर वापस ले सकते है ।

समय से पहले निकासी (Premature Closure): 

अगर   आपने ५ साल के लिए रखा और उससे पहले ही आपको पैसे की जरूरत पड़ जाए और बंद करना पड़े तो क्या नियम है ?

खाता खोलने के 1 साल के भीतर बंद करने पर कोई ब्याज नहीं मिलता। अगर १ साल से पहले बंद किया जाए तो उसपर १ रुपए भी ब्याज नहीं मिलता है , इसलिए इसमें सोच समझ कर पैसा डाले जिसकी आपको ५ साल जरूरत नहीं पड़ेगी , वहीं  पैसा उसमें जमा करे । चुकी इस स्कीम पर  तिहामी ब्याज मिलता हैं , इसलिए जब आप जमा करते है ब्याज ३ महीने बाद मिलने लगता है , लेकिन जब आप एक साल से पहले बंद करने जाते है तो यह पैसा आपके मूलधन में से काट लिया जाता है , जो ब्याज आपको दिया गया है उतना । इस लिए  हमेशा अगर आपको 15  लाख जमा करना है तो , 3  SCSS बनाए ५०००००/ के , ताकि अगर कभी जरूरत पड़ जाए तो एक तोड़कर काम हो जाए ।

अगर 1 से 2 साल के बीच बंद करना पड़ा तो आपके   मूलधन  या जितनबा पैसा आपने जमा किया था , का 1.5% काट  लिया जाता है , आइए इस अच्छे से समझते है |  मान लीजिए आपने  1000000/ रखा है  और एक साल के बाद आपको तोड़ने की जरूरत पड़ गई तब  बैंक / पोस्ट ऑफिस   आपका जमा पैसे का  1.5% मतलब  15000/- काट   लेगा  ।

अगर आपको  2 से 5 साल के बीच बंद करना पड़ा तो   1% की कटौती (पेनल्टी) का प्रावधान है ।  अगर 2 साल पूरे हो गए तो 1 % मतलब  10 लाख का 10000/- काट लिया  जाएगा |

इसलिए हमेशा इसमें वही पैसा रखे जिसकी आपको   5 साल में जरूरत  नहीं पड़ेगी । 

क्या लोन मिलता है ?

SCSS पर कोई लोन नहीं ले  सकते आप , ध्यान रखे इसलिए इसमें वही पैसा रखे जिसकी जरूरत आपको ५ साल नहीं लगेगी , अगर  लोन  चाहिए तो आप बैंक FD कर सकते है , जिसपर आप कभी भी 90 % तक  लोन ले सकते है ।  अपना पैसा अलग अलग बाट कर जमा करे , थोड़ा FD, कुछ PPF और SSC , इससे आपको  जरूरत पड़ने पर दिक्कत नहीं होगी।

SCSS कहा खोला जा सकता है ?

आप देश के किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (Public Sector Bank) या चुनिंदा निजी बैंकों (Private Banks) में SCSS (Senior Citizen Savings Scheme)  खाता खुलवा सकते हैं। 
भारत के किसी भी पोस्ट ऑफिस या डाकघर में SCSS अकाउंट आसानी से खोला जा सकता है। आपका  जिस भी बैंक में अकाउंट हो  वहां आप  अकाउंट खोल सकते है |

सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम खोले के लिए क्या क्या आवश्यक है ?

सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) के तहत खाता खोलने के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों और औपचारिकताओं की आवश्यकता होती है:
 1. SCSS खाता खोलने का फॉर्म (Account Opening Form)   बैंक या पोस्ट ऑफिस से मिलने वाला निर्धारित आवेदन फॉर्म।
 2. पहचान प्रमाण (Identity Proof):    पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी, या पासपोर्ट में से कोई एक।
 3. पते का प्रमाण (Address Proof):   आधार कार्ड, बिजली बिल, राशन कार्ड, या पासपोर्ट।
 4. बआयु प्रमाण (Age Proof):  
  •  60 वर्ष या उससे अधिक आयु के सामान्य नागरिकों के लिए (आधार कार्ड, पैन कार्ड, या जन्म प्रमाण पत्र)।
  •   55 से 60 वर्ष की आयु वाले सेवानिवृत्त रक्षा कर्मचारियों (Defense Employees) के लिए रिटायरमेंट का प्रमाण और आयु प्रमाण।
  •  50 से 60 वर्ष की आयु वाले अन्य सरकारी कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट और पेंशन से जुड़े दस्तावेज।
  •   पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ: खाताधारकों की हाल ही में खींची गई तस्वीरें (ज्वॉइंट अकाउंट होने पर दोनों की)।
  •  पैन कार्ड (PAN Card)   निवेश और टीडीएस (TDS) उद्देश्यों के लिए अनिवार्य।
 5. आरंभिक राशि:    खाता खोलने के लिए न्यूनतम 1,000 रुपये या उससे अधिक की चेक/नकद राशि (निवेश अधिकतम 30 लाख रुपये तक हो सकता है)।

हमने SCSS ( सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम) के बारे में लगभग सभी विषयों पर चर्चा करने का प्रयास किया , अब एक बात  जान लेते है चार्ट के माध्यम से की  आप कितना पैसा रखेंगे 8.20 % रेट से तो 5 साल में कितना होता है , आइए देखते है |

SCSS interest chart
इस चार्ट में हम देख  सकते है कि , 5 साल में कितना  ब्याज quarterly और 5 साल में  जोड़कर  कितना होता है , इस से आप अंदाजा लगा सकते है , कि SCSS सीनियर  लोगो  के लिये  काफी अच्छा है , कुछ पैसा तो इसमें  जरूर  रखना चाहिए | इस लेख को पढ़ने के बाद  मैं आशा करता हु आप SCSS अच्छे से  समझने लगे होगे | इस लेख  को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद |

धन्यवाद |



PPF( PUBLIC PROVIDENT FUND) लोक भविष्य निधि

PPF (Public Provident Fund) यानी लोक भविष्य निधि - एक लोकप्रिय, सुरक्षित और टैक्स-फ्री निवेश योजना


PPF
PPF benefits

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) यानी लोक भविष्य निधि भारत सरकार द्वारा चलाई जाने वाली एक बेहद लोकप्रिय और सुरक्षित लॉन्ग-टर्म स्माल सेविंग्स स्कीम है। यह उन निवेशकों के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है जो बिना किसी बाजार के जोखिम (Market Risk) के निश्चित और अच्छे रिटर्न के साथ टैक्स बचाना चाहते हैं। जहां तक मैं  जानता हु , इससे पुरानी और लोकप्रिय सरकार की कोई स्कीम नहीं है जिसे आमतौर पर सभी लोग जानते है | इस लेख में हम PPF यानी लोक भविष्य निधि के बारे में चर्चा  करेंगे , और उसके फायदे  जानने का प्रयास करेंगे | 


क्या आप जानते है ?

पीपीएफ योजना की शुरुआत  साल 1968 में वित्त मंत्रालय के  राष्ट्रीय बचत संस्थान (National Savings Institute)  द्वारा की गई थी। इसे मुख्य रूप से उन लोगों के लिए लाया गया था जो असंगठित क्षेत्र (Unorganized Sector) में काम करते थे या स्वरोजगार (Self-employed) से जुड़े थे, क्योंकि उस समय सरकारी कर्मचारियों की तरह उनके पास प्रॉविडेंट फंड (PF) या पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा की सुविधा नहीं हुआ करती थी। इसका उद्देश्य देश में छोटी बचतों (Small Savings) को जुटाना और दीर्घकालिक सुरक्षा देना था।

 इसे वैधानिक रूप देने के लिए सरकार द्वारा Public Provident Fund Act, 1968 लाया गया था, जिसके तहत देश के नागरिकों को इस योजना के नियम और लाभ मिलना शुरू हुए।
 शुरुआत में यह योजना केवल चुनिंदा सरकारी बैंकों और डाकघरों (Post Offices) के माध्यम से संचालित की जाती थी। समय के साथ इसके दायरे को बढ़ाया गया और अधिकृत निजी बैंकों को भी इसमें शामिल किया गया।

 दिसंबर 2019 में भारत सरकार ने पुराने  PPF Scheme 1968  को पूरी तरह से समाप्त    करके एक नया और अपडेटेड  PPF Scheme 2019  अधिसूचित किया।

 इस नए नियमों के तहत पुराने सभी प्रावधानों को आधुनिक डिजिटल बैंकिंग, समयपूर्व खाता बंद करने (Premature Closure), और लोन व विदड्रॉअल के नियमों को और अधिक स्पष्ट और सरल बनाया गया।

मुख्य विशेषताएं (Key Features at a Glance)

ब्याज दर (Interest Rate):

पीपीएफ पर मिलने वाली ब्याज दरों का निर्धारण सरकार द्वारा हर तिमाही (Quarterly) किया जाता है। वर्तमान में पीपीएफ पर 7.1% वार्षिक (चक्रवृद्धि ब्याज/Compound Interest) की दर से ब्याज दिया जा रहा है। मतलब साल में चार बार सरकार इसके इंटरेस्ट रेट  बदल सकती है , लेकिन आप देखेंगे कि PPF का ब्याज दर लगभग एक ही रहता है ,उसमें ज्यादा बदलाव नहीं होता है |

क्या आप जानते है ?

शुरुआती दौर (1968 से 1970 के दशक  जब पीपीएफ शुरू हुआ था, तब इसकी ब्याज दर 4.8% से शुरू हुई थी। उसके बाद    1968 से 1970 के बीच यह 4.8% थी। फिर   1970 से 1973 के बीच यह 5.0% थी। और आगे बदल कर  ​1973-74 में यह 5.3%  हो गई |   और यह  1974 से 1977 के बीच यह 5.8% के आसपास रही।


​इसके बाद 1977-78 में यह 7.0% पर आई और फिर 1980 के दशक के बाद इसमें लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली।
​90 के दशक और 2000 के शुरुआती दौर में यह बढ़कर 12% तक पहुंच गई थी, जो इसका स्वर्ण काल माना जाता है।

इसके बाद से यह घटकर वर्तमान में 7.1% पर चल रही है।  बहुत साल से यह 7% के नीचे तो नहीं आई |


निवेश सीमा (Investment Limits):

एक वित्त वर्ष (Financial Year) में कम से कम ₹500 और अधिकतम ₹1.5 लाख तक जमा किए जा सकते हैं। आप कम से कम 500 से  पीपीएफ का खाता खोल सकते है , और सिर्फ साल में 500  जमा कर खाता चालू रखा जा सकता है|

पैसे एकमुश्त (एक बार में) या अधिकतम 12 किस्तों में सालभर के दौरान जमा किए जा सकते हैं। मतलब आप साल में 12 बार हर महीने एक बार जमा कर सकते है , कम से कम 100 रुपये हर महीने से या साल में सिर्फ एक बार 500 जमा कर के या फिर 150000/-  अधिकतम मतलब 12500 /- हर महीने , या आप एक ही बार 150000/- भी जमा कर सकते है |

 PPF खाते की सामान्य अवधि 15 साल होती है। 15 साल पूरे होने के बाद इसे 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ाया जा सकता है। मतलब 15 साल पुरान होने के बाद 5 साल के लिए  अपने बैंक में एप्लीकेशन दे कर बढ़ा सकते है , और फिर अगले 5 साल के लिए  आप एप्लीकेशन देकर बढ़ा सकते है | और अपना खाता आगे तक चला सकते है |

ब्याज की गणना (Interest Calculation): 

पीपीएफ खाते में ब्याज की गणना हर महीने की 5 तारीख और महीने के आखिरी दिन के बीच के सबसे कम बैलेंस के आधार पर की जाती है। इसलिए यदि आप ज्यादा ब्याज का लाभ लेना चाहते हैं, तो हर महीने की 4 तारीख से पहले ही पैसे जमा कर दें। आप अपना पैसा 1-4 तारीख तक हर महीने तक डाल सकते है |   interest हर साल 31 मार्च को PPF अकाउंट में  क्रेडिट हो जाता है |

कर लाभ (Tax Benefits: EEE Model)

पीपीएफ देश की उन चुनिंदा निवेश योजनाओं में शामिल है जो EEE (Exempt-Exempt-Exempt) के दायरे में आती हैं:

 * आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत एक वित्त वर्ष में ₹1.5 लाख तक के निवेश पर टैक्स छूट मिलती है। OLD TAX Regime में ही आपको 80C  कि छूट मिलती है |

 *  खाते में मिलने वाला पूरा ब्याज पूरी तरह कर-मुक्त (Tax-Free) होता है। जैसे FD में interest पर TDS लगता है , 10 % वैसे PPF में जो ब्याज हर साल मिलता है उस पर कोई टैक्स नहीं लगता  है | इस लिए यह  सबसे लोकप्रिय बचत scheme है ,  बहुत सारी जगह पर जो हर साल इंटरेस्ट मिलता है उस पर टैक्स लगता है | पीपीएफ में आपको कोई टैक्स नहीं लगता है |

 मैच्योरिटी राशि: 

15 साल बाद मिलने वाली पूरी रकम (मूलधन + ब्याज) पर भी किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगता है। यह  सबसे बड़ा फायदा है , आपका कितना भी पैसा हो जाता है कई सालों के बाद उस पर टैक्स नहीं मिलता है | शायद ही market में कोई ऐसी scheme हो जो टैक्स फ्री है मैचुरिटी पर |

पात्रता (Eligibility)

 कौन खोल सकता है: 

 केवल भारत का नागरिक ही पीपीएफ खाता खोल सकता है।  PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) खाता खोलने की कोई अधिकतम आयु सीमा (Age Limit) नहीं है। किसी भी आयु में आप खाता खोल सकते है |

माता-पिता या कानूनी अभिभावक अपने 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की तरफ से भी पीपीएफ खाता खोल सकते हैं। उसमें  अपने माता-पिता के साथ खाता खोल सकते है , 18 वर्ष के बाद आप  इसे  अपने  बच्चे के नाम से कर सकते है , आपका नाम हटाकर | जब बच्चा छोटा होता है तब से खाता खोल कर  थोड़ा-थो थोड़ा पैसा डाला जाए , तो जब तक वो बड़ा होगा तब तक काफी पैसा जमा हो जाएगा |

एनआरआई (NRIs): अनिवासी भारतीय (NRI) नया पीपीएफ अकाउंट नहीं खोल सकते हैं। हालांकि, यदि कोई भारतीय नागरिक खाता खोलने के बाद NRI बनता है, तो वह मैच्योरिटी तक खाता जारी रख सकता है। यह बात   बहुत  ध्यान रखने की है | NRI   PPF खाता नहीं खोल सकते है |

 सीमा: 

एक व्यक्ति अपने नाम पर केवल एक ही खाता खोल सकता है। परिवार के सदस्यों के नाम पर अलग-अलग खाते खोले जा सकते हैं।  आप अपने परिवार के सभी सदस्यों   के नाम से खाते खोल सकते है , और अलग अलग पैसा जमा कर सकते है सबके नाम से 150000/- हर साल जमा कर सकते है |  

लोन और पैसे निकालने के नियम (Loan and Withdrawal Rules)

 आप खाता खोलने के वित्तीय वर्ष से तीसरे वर्ष से लेकर छठे वर्ष के अंत तक पीपीएफ बैलेंस पर लोन ले सकते हैं। यह लोन दूसरे साल के अंत में उपलब्ध बैलेंस का अधिकतम 25% तक मिल सकता है। आप अपना लोन लेने से पहले अवश्य बैंक से बात कर ले , कि वह आपको कितना लोन दे सकते है |

आंशिक निकासी (Partial Withdrawal): 

खाता खुलने के 7वें वर्ष से पैसों की आंशिक निकासी की अनुमति मिलती है। वित्तीय वर्ष में केवल एक बार ही पैसा निकाला जा सकता है।  पैसा   निकालने   से पहले अपने बैंक से पता लगा ले कि कितना पैसा मिलेगा | अपने बैंक से सही जानकारी अवश्य प्राप्त कर ले |

समयपूर्व बंद करना (Premature Closure): 

खाताधारक, उसके जीवनसाथी या बच्चों को गंभीर बीमारी होने पर या उच्च शिक्षा की  पड़ने पर 5 साल बाद खाता बंद करने की अनुमति मिलती है, हालांकि इस पर कुछ ब्याज काटकर जुर्माना लगाया जाता है। आप उस समय या तो (क) निकासी के आवेदन वाले वर्ष से ठीक पिछले साल के अंत के बैलेंस का 50%, या (ख) उससे 4 साल पहले के अंत के बैलेंस का 50% — इन दोनों में से जो भी कम हो, उतनी राशि निकाल सकते हैं

खाता बंद करने की जायज़ वजहें (Conditions): 

गंभीर बीमारी: खाताधारक को, उसके पति/पत्नी, बच्चों या आश्रित माता-पिता को कोई गंभीर या जानलेवा बीमारी हो जाने पर (इसके लिए सक्षम मेडिकल अथॉरिटी के कागजात देने होते हैं)।  आपको दस्तावेज जो उसको  प्रूफ कर सकते है , वो जमा करना आवश्यक है |

 
उच्च शिक्षा (Higher Education): खाताधारक खुद की या उसके बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए (इसके लिए मान्यता प्राप्त संस्थान का एडमिशन लेटर और फीस के दस्तावेज दिखाने जरूरी हैं)।  

 
प्रवासी भारतीय (NRI) बनना: यदि खाताधारक भारत की नागरिकता छोड़कर विदेश में बस गया हो और उसका रेजिडेंसी स्टेटस बदल गया हो (इसके लिए पासपोर्ट, वीजा आदि देना होता है)। आप हमेशा के लिए देश छोड़कर  जाना चाहते है , जरूरी दस्तावेज दिखाकर आप खाता बंद कर सकते है |

यह ध्यान रखने की बात यह है कि खाता कम से कम 5 वित्तीय वर्ष पुराना होना चाहिए (यानी 5 साल पूरे होने के बाद ही यह आवेदन किया जा सकता है और अपना खाता उचित  दस्तावेज दिखा कर आप खाता बंद कर  सकते है |

खाता कहाँ और कैसे खोलें?

 आप किसी भी अधिकृत सरकारी या प्राइवेट कमर्शियल बैंक (जैसे SBI, ICICI, PNB आदि) या  नजदीकी  पोस्ट ऑफिस (डाकघर) में जाकर पीपीएफ खाता खुलवा सकते हैं। आपका जिस बैंक में  खाता है वह जाकर पीपीएफ खाता खोल सकते है |

आज के समय में कई बैंक घर बैठे इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप (जैसे YONO SBI) के जरिए भी ऑनलाइन पीपीएफ अकाउंट खोलने की सुविधा देते हैं।

आवश्यक दस्तावेज:

 * पैन कार्ड (PAN Card)

 * आधार कार्ड (Aadhaar Card - पहचान और पते के प्रमाण के रूप में)

 * पासपोर्ट साइज फोटो

 * बैंक पासबुक या कैंसल चेक

आपको  PPF ( पब्लिक प्रोविडेंट फंड )  के बारे में बहुत जी जानकारी मिली , अब अंत में मैं एक chart आप कितना पैसा जमा कर के 15 साल में कितना पैसा आपको मिलेगा रेट ऑफ इंटरेस्ट 7.10 % .


यहां आप देख सकते है कि , अगर 150000/- हर साल जमा किया जाए तो 15 साल में आपको 4068000/- मिलते है , वो भी टैक्स फ्री  अगर आप इसे और 5 साल के लिए बढ़ा देते है और ऐसे ही चलने देते है तो 5 साल बाद आपको 66.58 lakh मिलते है , अगर आप और 5 साल बढ़ा देते है तो आपको 1.03 करोड़ मिलते है , मतलब आप  हर साल 150000/- जमा कर के 25 साल में 1.03 करोड़ हो जाते है | इस लिए यह स्कीम आज भी उतनी ही लोकप्रिय है , जितनी कि पहले थी | हमने PPF से  संबंधित लगभग सभी विषयों पर चर्चा की  , आशा करता हु कि अब आप पीपीएफ के फायदे समझ गए | यह लेख पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद|
धन्यवाद |