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BHIM क्या है ?

BHIM (Bharat Interface for Money)



Benefits of Bhim App
Benefits of Bhim 


BHIM (भीम) ऐप भारत सरकार की एक डिजिटल भुगतान सेवा है, जो यूपीआई (UPI) तकनीक पर काम करती है ,  इसे दिसंबर 2016 में लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य देश में कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देना है। पिछले लेख में हमने UPI से संबंधित  बहुत सारे  विषयों पर चर्चा की , UPI क्या  है , किसने बनाया और कैसे कम करता है , इस लेख के पढ़ने से पहले  वह लेख अवश्य पढ़ ले UPI पर लेख पढ़ने के लिए  यहां CLICK करे | हमने  UPI से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण तथ्यों पर चर्चा की है , आइए अब हम उनमें से एक ऐप जो सबसे पहले NPCI , ने बनाया था UPI के द्वारा लेन देन   करने के लिए , एक बात अवश्य जान ले कि  BHIM ही एक ऐसा ऐप है जो स्वयं NPCI , यानी जिसने UPI बनाया उसका है , बाकी सब अलग  अलग कंपनियों ने UPI का इस्तेमाल करके बनाया है  , इसलिए  जहां तक संभव हो आप BHIM का इस्तेमाल करे| आइए  अब हम भीम ऐप  पर चर्चा करते है | क्या आप भीम ऐप इस्तेमाल करते ?

BHIM ऐप की मुख्य विशेषताएं

सुरक्षित और सीधा लेनदेन 

यह ऐप सीधे बैंक खाते से बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा देता है। इसमें किसी डिजिटल वॉलेट में पैसे लोड करने की आवश्यकता नहीं होती। सीधे आपके बैंक खाते से दूसरे के खाते में पैसा तुरंत ट्रांसफर होता है , बीच में कोई THIRD  Party नहीं होता , यह सीधे बैंक के अकाउंट से लिंक होकर काम करता है |

कई भाषाओं का समर्थन 

यह ऐप हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 15 से अधिक भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है, जिससे देश के किसी भी हिस्से के लोग इसे अपनी मातृभाषा में आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रमुख भाषाएं इस प्रकार हैं:
 हिंदी और  अंग्रेजी ,तमिल (Tamil) ,तेलुगु (Telugu), कन्नड़ (Kannada),मलयालम (Malayalam),मराठी (Marathi),गुजराती** (Gujarati),बंगाली** (Bengali) ,पंजाबी** (Punjabi), अड़िया/उड़िया(Odia), असमिया (Assamese) ,उर्दू (Urdu) ,संस्कृत(Sanskrit),कोंकणी(Konkani),मणिपुरी(Manipuri),बोडो(Bodo),डोगरी (Dogri) ,मैथिली(Maithili) ,संथाली (Santali,सिंधी(Sindhi)|  यह एक ऐसा ऐप है जो इतनी भाषाएं में आप इस्तेमाल  कर सकते  है |

विभिन्न भुगतान के तरीके

आप यूपीआई आईडी (VPA), मोबाइल नंबर, क्यूआर कोड (QR Code) स्कैन करके या सीधे बैंक खाता संख्या और IFSC कोड के जरिए पैसे भेज सकते हैं। आप इन  कई  तरीकों से अपना पैसा भेज सकते है |


विशेष आधुनिक फीचर्स (BHIM 3.0)  

इसमें स्पिट एक्सपेंस (दोस्तों या परिवार के बीच खर्च बांटना), फैमिली मोड, खर्च का विश्लेषण (Spend Analytics Dashboard) और बिना इंटरनेट या कम नेटवर्क में भी काम करने जैसी एडवांस सुविधाएं जोड़ी गई हैं।

छोटे भुगतानों के लिए UPI लाइट 

₹500 तक के छोटे भुगतानों के लिए बिना पिन (PIN-less) के तुरंत भुगतान की सुविधा मिलती है। इसे आप अपने ऐप से चालू कर सकते है | आप इसमें अपना क्रेडिट कार्ड भी जोड़ सकते है ।

लेन-देन की सीमा (Transaction Limits)

आप BHIM ऐप के जरिए प्रति दिन अधिकतम ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) तक का ट्रांजेक्शन कर सकते हैं| पहले ट्रांजेक्शन लिमिट कम थी , पर आज आप एक दिन में 100000/- तक ट्रांजेक्शन  कर सकते है |

ऐप पहली बार इंस्टॉल करने के शुरुआती 24 घंटों के लिए ट्रांजेक्शन लिमिट ₹5,000 होती है, जो 24 घंटे बाद बढ़कर ₹1 लाख हो जाती है।

कैशबैक और रिवार्ड

​भीम ऐप समय-समय पर (जैसे अपनी सालगिरह या विशेष त्योहारों पर) 100% तक कैशबैक (जैसे छोटे लेनदेन जैसे ₹20 खर्च करने पर पूरा कैशबैक) जैसे खास ऑफर्स अपने यूजर्स के लिए लाता रहता है। यह कैश बैक सीधे आपके अकाउंट में तुरंत क्रेडिट होता  है |

BHIM ऐप से जुड़ी कुछ मुख्य बातें 


1.  इसे सीधे भारत सरकार के अंतर्गत NPCI (National Payments Corporation of India) द्वारा विकसित किया गया है। इसलिए यह गवर्नमेंट ऐप है |
2.  यह पूरी तरह से विज्ञापन-मुक्त (Ad-free) है। इसमें कोई थर्ड-पार्टी ऑफर्स, लोन के विज्ञापन या कैशबैक के लिए अनचाहे फीचर्स नहीं होते।
3. इसका इंटरफेस बहुत ही सरल, हल्का (Lightweight) और सीधा है, जिसे इस्तेमाल करना बेहद आसान है।
4. ​चूँकि भीम ऐप को NPCI द्वारा सीधे बनाया गया है, इसलिए इसे सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित प्लेटफॉर्म माना जाता है क्योंकि इसमें बीच में कोई प्राइवेट वॉलेट या बिचौलिया नहीं होता।

इस लेख में हमने बहुत कुछ जाना , यदि और जानना है तो आप  भीम ऐप के official वेबसाइट के लिए यहां  click कर सकते है।

 हमेशा किसी भी नए आदमी को पैसा अगर  अकाउंट या मोबाइल नंबर से भेजना है तो , सबसे पहले आप १ रुपए भेज कर अवश्य चेक कर ले, ताकि आपका पैसा किसी गलत अकाउंट में न जाए । सभी सावधानी के बावजूद अगर  आप का पैसा भीम ऐप में फंस जाता है तो आपको शिकायत  कैसे दर्ज  करना है , आइए अब इस महत्वपूर्ण बात को समझते है , अगर आप  कभी ट्रांजैक्शन कर रहे है, और पैसा डेबिट हो जाता है और  सामने वाले के अकाउंट में क्रेडिट नहीं होता तो क्या करे ?

BHIM App में ट्रांजैक्शन या किसी अन्य समस्या के लिए शिकायत दर्ज करने के दो मुख्य तरीके हैं: ऐप के अंदर (In-app) और एनपीसीआई (NPCI) पोर्टल के माध्यम से।

BHIM ऐप खोलें और Transaction History (लेन-देन इतिहास) पर जाएं।

उस संबंधित ट्रांजैक्शन को चुनें जिसमें समस्या है।

Report Issue या Raise Complaint विकल्प पर क्लिक करें।

अपनी समस्या का कारण चुनें (जैसे- पैसा कट गया लेकिन प्राप्तकर्ता को नहीं मिला) और सबमिट करें।

NPCI पोर्टल के माध्यम से (DigiSaathi / NPCI Dispute Portal):

NPCI की आधिकारिक वेबसाइट npci.org.in पर जाएं या सीधे DigiSaathi (disputeredressal.npci.org.in) पोर्टल का उपयोग करें।

Dispute Redressal Mechanism (DRM) सेक्शन में जाएं।

'UPI' विकल्प चुनें और Transaction ID, UPI ID, बैंक का नाम, और ट्रांजैक्शन की तारीख दर्ज करके शिकायत दर्ज करें।

टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर:

आप NPCI की यूपीआई हेल्पलाइन नंबर 1800-120-1740 पर कॉल करके भी सहायता ले सकते हैं।

आप अपने बैंक में जाकर भी , जिसका अकाउंट उससे जुड़ा हो , वहां फॉर्म भरकर complain कर सकते है , बैंक आपका  complain अपने पोर्टल पर अपडेट कर देता है । आप यही procedure अन्य थर्ड पार्टी ऐप  के लिए भी उपयोग कर सकते है , सभी ऐप में कंप्लेन करने का ऑप्शन होता है । आइए अब हम ऐप से जुड़े कुछ सवाल ले लेते है ।

1. BHIM ऐप क्या है और इसे किसने बनाया है?

यह नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा विकसित एक यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) आधारित ऐप है, जिसकी मदद से तुरंत पैसे ट्रांसफर किए जा सकते हैं।

क्या BHIM ऐप इस्तेमाल करने के लिए इंटरनेट जरूरी है?

हाँ, ऐप आधारित ट्रांजैक्शन के लिए इंटरनेट चाहिए, लेकिन बिना इंटरनेट के भी *99# डायल करके यूएसएसडी (USSD) कोड के जरिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

BHIM ऐप की डेली ट्रांजैक्शन लिमिट कितनी है? 

आम तौर पर BHIM ऐप से एक दिन में अधिकतम 1 लाख रुपये तक ट्रांसफर किए जा सकते हैं और प्रति ट्रांजैक्शन की सीमा भी बैंक के नियमों के अनुसार तय होती है।

क्या BHIM ऐप का इस्तेमाल करने पर कोई चार्ज लगता है? 

नहीं, BHIM ऐप से बैंक खाते में पैसे भेजने या मंगाने के लिए एनपीसीआई की तरफ से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।

BHIM ऐप में एक साथ कितने बैंक खाते जोड़े जा सकते हैं? 

आप अपने एक ही मोबाइल नंबर से जुड़े कई बैंकों के खातों को इस ऐप में लिंक कर सकते हैं और जरूरत के अनुसार प्राइमरी अकाउंट बदल सकते हैं। आप इसमें अपना क्रेडिट कार्ड भी जोड़ सकते है ।

अगर BHIM ऐप से पैसे कट जाएं और सामने वाले को न मिलें तो क्या करें? 

ऐसी स्थिति में ट्रांजैक्शन फेल होने पर आमतौर पर पैसे 3 से 5 दिन में  (working days) के भीतर स्वतः आपके खाते में वापस आ जाते हैं।  अगर उतने दिन में पैसा नहीं आता तो आप ऐप के 'Help' या 'Transaction History' सेक्शन में जाकर शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं। या अपने बैंक में जाकर वहां भी शिकायत दर्ज करा सकते है ।

इस लेख में हमने  लगभग सभी पहलू पर जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया , अब अंत में यह जान ले कि  UPI चालू करने के लिए क्या क्या आवश्यकता है ?

  1. एक स्मार्टफोन (एंड्रॉइड या आईओएस)
  2. एक बैंक खाता जिससे आपका मोबाइल नंबर लिंक हो
  3. बैंक खाते से जुड़ा डेबिट/एटीएम कार्ड (UPI PIN सेट करने के लिए)
  4.  कोई भी अपना भीम ऐप पर UPI चालू कर सकता है ।

भारत के कुल डिजिटल ट्रांजैक्शन में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। सरकारी आंकड़ों (PIB/NPCI) के अनुसार, देश के कुल डिजिटल भुगतानों में UPI की हिस्सेदारी लगभग 85% है।

 दुनिया भर में होने वाले कुल रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन में अकेले UPI की हिस्सेदारी लगभग 49% है ।

वर्तमान में भारत में प्रतिदिन औसतन 60 से 66 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन केवल UPI के माध्यम से होते हैं।

कुल UPI वॉल्यूम का लगभग 63% हिस्सा मर्चेंट या दुकानदारों को किए जाने वाले भुगतान (Person-to-Merchant) का होता है, जो छोटे और रोजमर्रा के लेन-देन में इसकी भारी लोकप्रियता को दिखाता है।

अगस्त 2026 में UPI लेनदेन की संख्या (Volume) अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। इस महीने कुल 24.51 अरब (24.51 Billion) ट्रांजैक्शन हुए, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 22% अधिक हैं।

अगस्त 2026 में कुल 29.82 लाख करोड़ रुपये मूल्य के लेनदेन किए गए। हालांकि मई और जुलाई 2026 में यह आंकड़ा लगभग 29.9 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड के करीब पहुंच चुका है।

 पिछले एक दशक में UPI के दायरे में भारी बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2016-17 के शुरुआती दौर से लेकर अब तक ट्रांजैक्शन वैल्यू में 4,000 गुना से अधिक की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।

भारत का यह डिजिटल पेमेंट नेटवर्क अब देश के बाहर कुल 11 देशों (जैसे सिंगापुर, यूएई, फ्रांस, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और उज्बेकिस्तान आदि) में सक्रिय और स्वीकृत है। और भी देश धीरे धीरे इसे  अपनाने की तैयारी कर रहे है ।


 यह UPI ही है जिससे कि आज आपन १ रुपए भी ऑनलाइन भेज सकते है ,  सब्जी वाले से लेकर दूध वाले और बढ़ी दुकानों और यहां  तक कि फुटपाथ पर समान बेचने वाले भी UPI  का इस्तेमाल करते है  । और यह दुनिया में पहला ऐसा ऐप है । और इस पर सभी भारतीयों  को गर्व होना चाहिए ।  भीम ऐप में कभी कभी जब आप QR  CODE  इमेज गैलरी से सेलेक्ट  करते है तो २०००/- से ज्यादा नहीं भेज पाते , उस समय आप किसी और मोबाइल  में QR  code भेज कर सीधा स्कैन  करके   ट्रांजैक्शन कर सकते है ।   मैं आशा करता हु कि इस लेख से आपको BHIM ऐप से जुड़ी जानकारी प्राप्त  हुई होगी । यह लेख पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद ।

धन्यवाद ।

UPI ( यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) क्या है ?

यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI)

UPI features
UPI benefits


यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा विकसित भारत की एक रियल-टाइम मोबाइल पेमेंट प्रणाली है। इसकी मदद से आप तुरंत और आसानी से पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। शायद ही कोई ऐसा भारत में होगा जिसने UPI , से पेमेंट नहीं किया , मतलब आपने  दुकान  पर स्कैनर से अवश्य पेमेंट किया होगा , और आपके मोबाइल में phonPe, Paytm , GPay, Bhim , इनमे से कोई न कोई ऐप अवश्य इंस्टॉल होगा , लेकिन क्या आप जानते है इसकी शुरुआत कब और कैसे हुई ? और ये सब कैसे काम करता है ? पहले पेमेंट करना इतना आसान नहीं था जितना कि आज हैं , आप १ रुपए भी ऑनलाइन पेमेंट कर सकते है । आज का विषय है UPI , जिसने ऑनलाइन पेमेंट करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया हमेशा के लिए । आज हम इसी विषय पर चर्चा करेंगे । आइए सबसे पहले  शुरुआत इसके इतिहास से करते है ।

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इतिहास

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इतिहास केवल एक नई भुगतान तकनीक की शुरुआत मात्र नहीं है, बल्कि यह भारत के डिजिटल और आर्थिक क्षेत्र की सबसे बड़ी क्रांतिकारी गाथा है। UPI के विकास और इसके सफर की पूरी कहानी को हम समझने का प्रयास करेंगे । सबसे पहले हम NPCI यानि नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया  से शुरुआत करते है , क्योंकि ये नहीं होता तो UPI नहीं होता , पहले NPCI बना फिर उसने  UPI बनाया , आइए जानते है NPCI के बारे में ।

NPCI की स्थापना

एनपीसीआई (NPCI) की स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के मार्गदर्शन और पहलों के तहत की गई थी। इसे देश के भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) के प्रावधानों के तहत दिसंबर 2008 में एक 'नॉट-फॉर-प्रॉफिट' (लाभ न कमाने वाली) कंपनी के रूप में गठित किया गया था।

शुरुआत में इसे देश के 10 मुख्य प्रमोटर बैंकों (Core Promoter Banks) ने मिलकर बनाया था। इन शुरुआती बैंकों के नाम नीचे दिए गए हैं:

  1. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
  2. पंजाब नेशनल बैंक (PNB)
  3. केनरा बैंक (Canara Bank)
  4. बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda)
  5. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India)
  6. बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India)
  7. आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank)
  8. एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank)
  9. सिटिब बैंक (Citibank N.A.)
  10. एचएसबीसी (HSBC)

इन प्रमुख सार्वजनिक (Public), निजी (Private) और विदेशी बैंकों ने मिलकर एनपीसीआई की शुरुआती वित्तीय और ढांचागत नींव रखी थी, ताकि भारत में डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत किया जा सके। बाद में समय के साथ इसके दायरे को बढ़ाया गया और देश के अन्य बैंकों व वित्तीय संस्थानों को भी इसमें शामिल किया गया। और जानकारी की लिए आप NPCI के ऑफिशियल वेबसाइट   https://www.npci.org.in/ पर जाकर प्राप्त कर सकते है।

UPI के आने से पहले पैसे भेजने के लिए NEFT या RTGS का इस्तेमाल किया जाता था, जिसमें समय लगता था। इसके बाद NPCI ने IMPS (Immediate Payment Service) लॉन्च किया, जो 24/7 तुरंत पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा देता था। इसी IMPS तकनीक को आगे चलकर UPI का बेस (आधार) बनाया गया। IMPS की चर्चा हम अलग से किसी और लेख में करेंगे , अभी बस इतना समझ लीजिए कि IMPS में सिर्फ मोबाइल SMS का एक फॉर्मेट होता था , उससे पैसा ट्रांसफर किया जा सकता था , विस्तार से चर्चा बाद में करेंगे , अभी UPI की बात करते है ।

आधिकारिक लॉन्च और शुरुआत

11 अप्रैल 2016 को  आरबीआई के तत्कालीन गवर्नर डॉ. रघुराम राजन ने मुंबई में 21 सदस्य बैंकों के साथ मिलकर UPI का आधिकारिक पायलट लॉन्च किया।

इसका मुख्य उद्देश्य बार-बार बैंक खाता नंबर और IFSC कोड डालने के झंझट को खत्म करना था। इसकी जगह एक वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA / UPI ID) के जरिए तुरंत पैसे भेजना या मंगाना संभव बनाया गया।

अगस्त 2016 को  देश के प्रमुख बैंकों ने अपने मोबाइल ऐप्स पर UPI फीचर लाइव करना शुरू किया, जिसके बाद यह आम जनता के लिए पूरी तरह खुल गया।

UPI को आम लोगों तक आसानी से पहुँचाने और इसे बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री जी  ने BHIM (Bharat Interface for Money) ऐप लॉन्च किया। अब हम UPI के इतिहास के बारे में समझ गए , अब हम यह जानने का प्रयास करेंगे कि यह काम कैसा करता है ?

UPI (Unified Payments Interface) एक रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट सिस्टम है, जिसकी मदद से आप बिना बैंक अकाउंट नंबर या IFSC कोड शेयर किए किसी भी समय, तुरंत एक बैंक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट में पैसे भेज और प्राप्त कर सकते हैं।

UPI कैसे काम करता है (प्रक्रिया):

1.UPI का उपयोग करने के लिए आपको किसी भी पेमेंट ऐप (जैसे Google Pay, PhonePe, Paytm या BHIM) पर अपनी बैंक डिटेल्स लिंक करके एक यूनिक आईडी बनानी होती है, जिसे UPI ID कहते हैं (जैसे name@bankname), या mobilenumber@upi। सबसे पहले आप कोई भी ऐप अपने मोबाइल में इंस्टॉल करते है , सबसे पहला काम  वर्चुअल पेमेंट एड्रेस या UPI ID बनाना होता है , कई प्रकार के UPI Id अलग अलग ऐप द्वारा इस्तेमाल किया जाता है 

क्या आप जानते है ?

UPI ID (जिसे Virtual Payment Address या VPA भी कहा जाता है) का एक मानक और निश्चित प्रारूप (Standard Format) होता है। यह हमेशा दो मुख्य भागों से मिलकर बनता है, जिन्हें बीच में '@' (at the rate) चिन्ह से जोड़ा जाता है।

मानक प्रारूप:

\text{Unique Prefix} \text{ @ } \text{Bank/App Handle}

पहला भाग (Prefix / User Identifier): यह यूनिक होता है जिसे यूजर खुद चुनता है। इसमें आपका नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल का हिस्सा, या कोई अन्य अल्फा-न्यूमेरिक अक्षर (जैसे letters और numbers) हो सकते हैं।

दूसरा भाग (Suffix / Handle): यह उस बैंक या ऐप को दर्शाता है जिसके साथ वह UPI ID रजिस्टर्ड है। इसे 'हैंडल' (Handle) कहा जाता है (उदाहरण के लिए: paytm, ybl, okaxis, sbi)।

अतिरिक्त नियम और विशेषताएं:

केस-सेंसिटिविटी: UPI ID आमतौर पर केस-इंसेंसिटिव होती है (यानी छोटे या बड़े अक्षर से फर्क नहीं पड़ता, जैसे Rahul@paytm और rahul@paytm एक ही माने जाते हैं)।

विशेष चिन्ह: इसमें अंग्रेजी के अक्षर (a-z), अंक (0-9), और कुछ खास चिन्ह जैसे डॉट (.), हाइफन (-), या अंडरस्कोर (_) का उपयोग किया जा सकता है।

स्पेस की अनुमति नहीं: UPI ID के बीच में कभी भी खाली जगह (Space) नहीं होती है।

अब हम भारत में इस्तेमाल होने वाले लोकप्रिय UPI ID देखते है , जिससे आपको पता चल जाएगा कि ,आमतौर पर कौन से UPI ID भारत में इस्तेमाल होते  है ।

बैंक-आधारित UPI IDs

जिनके लास्ट में बैंक के नाम लगे हुए होते है या  बैंक के शॉर्ट नाम का इस्तेमाल होता है  , जैसे कि 

rahul.kumar@okaxis (Axis Bank)

priya123@okhdfcbank (HDFC Bank)

amit.sharma@ybl (Yes Bank / PhonePe)

pooja@sbi (State Bank of India)

neha.gupta@okicici (ICICI Bank)

थर्ड-पार्टी ऐप्स के UPI हैंडल (Handles)

भीम ऐप UPI का ऑफिशियल ऐप है , उसके अलावा सब  थर्ड पार्टी ऐप होते है , इनमें से लगभग आपने सभी नाम सुने होगे , आइए देखते है ।

Google Pay: name@okhdfcbank या name@okaxis

PhonePe: name@ybl या name@ibl

Paytm: name@paytm

BHIM App: name@upi

आप अपनी पसंद का कोई भी उपलब्ध नाम (जैसे अपना नाम या फोन नंबर का हिस्सा) चुनकर अपनी खुद की UPI ID बना सकते हैं। यहां हमने upi id के लगभग सभी पहलू अच्छे से समझने का प्रयास किया , आप इनमें से UPI ID चुन सकते है । सबसे पहले आपने UPI ID बना ली । अब पिन सेट करना है ।

UPI पिन (MPIN) 

ट्रांजैक्शन को सुरक्षित रखने के लिए 4 या 6 अंकों का एक सीक्रेट पिन सेट करना होता है, जो पैसे भेजते समय दर्ज करना अनिवार्य होता है। पिन चुनते समय हमेशा ऐसा पिन चुने जो आप ध्यान रख सके ।

पहली बार UPI चालू करने की प्रक्रिया 

अब हम यह बात करेंगे कि आप सबसे पहली बार UPI कैसे चालू कर सकते है , आइए अब विस्तार से चर्चा करते है ।

किसी भी नए UPI ऐप (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm, BHIM या Bajaj Pay आदि) में UPI चालू करने और नया अकाउंट सेट अप करने की  पूरी प्रक्रिया पर हम आराम से चर्चा करेंगे , ताकी आप अच्छे से समझ सके ।

ऐप डाउनलोड और इंस्टॉल करना 

सबसे पहले अपने स्मार्टफोन के Google Play Store (Android) या Apple App Store (iPhone) से अपनी पसंद का कोई भी UPI पेमेंट ऐप डाउनलोड करके इंस्टॉल करें। जैसे PhonePe, Bhim, GPay आदि ।

भाषा का चयन और मोबाइल नंबर दर्ज करना

अब आपका ऐप ओपन  करे अपनी पसंदीदा भाषा (जैसे हिंदी या अंग्रेजी) चुनें। इसके बाद अपना वह मोबाइल नंबर दर्ज करें जो आपके बैंक अकाउंट के साथ रजिस्टर्ड (लिंक) है। ध्यान दें कि वेरिफिकेशन के लिए सिम कार्ड इसी फोन में लगा होना चाहिए। आपके फोन अगर दो सिम है , तो डिफॉल्ट sms  उस नंबर से कर दे जो आपके अकाउंट से जुड़ा हो , अगर आपका नंबर अकाउंट से नहीं जुड़ा होगा तो  यहां से आगे नहीं जा पाएंगे ।

मोबाइल नंबर का वेरीफिकेशन (OTP)

मोबाइल नंबर डालने के बाद 'Verify' या 'Continue' पर क्लिक करें। आपके उस नंबर पर एक ऑटोमैटिक OTP (वन-टाइम पासवर्ड) आएगा, जो ऐप द्वारा अपने आप डिटेक्ट कर लिया जाएगा और आपका नंबर वेरिफाई हो जाएगा। अगर ऐप डिटेक्ट नहीं करता तो आप खुद भी टाईप करके डाल सकते है, ओटीपी डालते ही आप आगे बढ़ जाते है।

बैंक अकाउंट लिंक करना

बिना बैंक अकाउंट लिंक किए आप  कोई पैसा नहीं भेज पाएंगे , इसलिए यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है , सफलतापूर्वक लॉगिन होने के बाद ऐप के होम पेज या प्रोफाइल सेक्शन में जाएं। वहां 'Add Bank Account' या 'Link Bank Account' के विकल्प पर क्लिक करें। आपके सामने बैंकों की एक सूची आएगी, उसमें से आपका खाता जिस बैंक में  हो और आपका अकाउंट नंबर लिंक हो  उस बैंक का नाम चुनें। ऐप आपके मोबाइल नंबर से जुड़े बैंक खाते की खोज  करने के लिए प्रोसेस करेगा , अगर मिल जाता है तो ऐप  उसे आपके  UPI ID से जोड़ देगी। मतलब जब आप ट्रांजैक्शन UPI से करेंगे इसी अकाउंट से पैसा  कटेगा  अवश्य ध्यान रखे ।

UPI पिन सेट करना (अत्यावश्यक चरण)

यदि आप इस बैंक खाते का पहली बार किसी UPI ऐप में इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपको UPI PIN बनाना होगा। UPI  पिन सेट करने की प्रक्रिया नीचे दी गई है ,  aapna ATM debit Card  जो उस खाते से लिंक हो , पास में रख ले  , अब यह प्रक्रिया ध्यान से समझ ले और आपका  पिन हमेशा गोपनीय  रखे  ।

1. इसके लिए 'Set UPI PIN' या 'Create PIN' पर क्लिक करें।

2. अपने डेबिट कार्ड/एटीएम कार्ड के आखिरी 6 अंक और उसकी एक्सपायरी (माह और वर्ष) दर्ज करें।

3. आपके बैंक रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा, उसे दर्ज करें।

4. इसके बाद अपनी पसंद का 4 या 6 अंकों का गुप्त UPI पिन दर्ज करें और दोबारा दर्ज करके उसकी पुष्टि करें। अब आपका पिन सेट हो चुका है।

UPI ID की जाँच करना या नई बनाना

बैंक खाता लिंक होने के बाद ऐप स्वतः ही आपकी एक यूनीक UPI ID बना देता है (जैसे mobilenumber@ybl या name@oksbi)। आजकल कई ऐप्स में अपनी पसंद के अक्षरों या नंबरों मिलाकर कस्टम (मनपसंद) UPI ID बनाने का विकल्प भी मिलता है, जिसे आप प्रोफाइल में जाकर सेट कर सकते हैं। UPI ID की चर्चा हम विस्तार से कर चुके है ।

इन चरणों को पूरा करने के बाद आपका नया UPI ऐप पूरी तरह तैयार हो जाता है। अब आप किसी भी दुकान के QR कोड को स्कैन करके या, C/O किसी के मोबाइल नंबर व UPI ID पर आसानी से पैसे भेज सकते हैं और बैलेंस चेक कर सकते हैं। और जान सकते है कि सब सही सही हो गया है । एक बात अवश्य ध्यान रखे  किसी भी मोबाइल नंबर या बैंक अकाउंट में पहला  ट्रांजैक्शन  १ रुपए का करके उस व्यक्ति से अवश्य पूछ कर कन्फर्म कर ले ताकि आपका पैसा किसी और को न  चला जाए ।

लेनदेन (Transaction) की पूरी प्रक्रिया

अब हम बात करते है UPI ट्रांजैक्शन काम कैसे करता है ,  कैसा  चलता है , आइए इसको समझने का प्रयास करते है ।

शुरुआत (Initiation): 

पैसे भेजने वाला व्यक्ति ऐप खोलकर या तो रिसीवर की UPI ID दर्ज करता है, या दुकान/व्यक्ति का QR कोड स्कैन करता है और राशि (Amount) टाइप करता है। सबसे पहले आप अपने ऐप ओपन करते है , आपको मोबाइल नंबर/ qr code / Bank account सेलेक्ट करते है , उसका जिसको आपको पैसा भेजना होता है , फिर आप  जितना पैसा देना हो उतनी राशि टाइप करते है ।

पिन दर्ज करना: 

राशि दर्ज करने के बाद, भेजने वाला अपना गोपनीय UPI पिन डालता है। जो आपने सेट की थी वो दर्ज करनी होती है ।

बैंक वेरिफिकेशन:

इस  रिक्वेस्ट  को  NPCI आपके बैंक को भेज देता है , आपका बैंक आपका पिन और  अकाउंट बैलेंस चेक करता है     बैंक पिन की जांच करता है और अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करता है।

सफलता (Completion): 

वेरिफिकेशन सफल होने पर भेजने वाले के खाते से पैसे कटकर तुरंत प्राप्तकर्ता (Receiver)  बैंक खाते में जमा हो जाते हैं, और दोनों पक्षों को तुरंत नोटिफिकेशन मिल जाता है।और आपको तुरंत बैंक से पैसे काटने का मैसेज प्राप्त हो जाता है ।

NPCI ने UPI को एक 'ओपन API' स्टैंडर्ड बनाया। इसका परिणाम यह हुआ कि सिर्फ बैंकों के अलावा Google Pay, PhonePe, और Paytm जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स (TPAPs) ने इस इकोसिस्टम में प्रवेश किया। इन ऐप्स के आसान यूजर इंटरफेस और कैशबैक ऑफर्स ने UPI को घर-घर तक पहुँचा दिया।

इस लेख में हमने  UPI कैसे चालू करे , पहली बार , पिन सेट करना इत्यादि , अभी UPI से जुड़ी बहुत सारी जानकारी है , UPI  ने हाल ही में १० साल पूरे कर लिए , और आज डिजिटल ट्रांजैक्शन का मतलब UPI  ही है , अब आगे की चर्चा अगले लेख में  करेंगे क्योंकि यह लेख काफी बड़ा हो गया है ,  मै आशा करता हु कि  आपको UPI के विषय में चर्चा करके अच्छा लगा होगा । यह लेख पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद ।

धन्यवाद ।


RTGS क्या है?

 RTGS (Real-Time Gross Settlement)


RTGS transaction Flow
RTGS TRANSACTION FLOW

RTGS (Real-Time Gross Settlement) बड़े पैमाने पर फंड ट्रांसफर के लिए भारत की एक प्रमुख और सुरक्षित वित्तीय प्रणाली है। इसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा संचालित किया जाता है। पिछले लेख में हमने  NEFT के बारे में विस्तार से चर्चा की , इस लेख में आगे  जाने से पहले  उस लेख को यहां click एक बार अवश्य पढ़ ले ,  ताकि आपको RTGS  समझने में आसानी हो सके ।इस लेख में हम आरटीजीएस के बारे में विस्तार  से चर्चा करेंगे , NEFT हम कम से कम १ रुपए का भी कर सकते थे , और वो बैच में ट्रांजैक्शन पूरा होता है , लेकिन RTGS , कम से कम २ लाख या २ लाख के ऊपर ही किया जा सकता है , और यह  एक एक ट्रांजैक्शन अलग अलग पूरा किया जाता है । आइए अब इसके  मुख्य विषयों  पर चर्चा करते है ।

क्या आप जानते है ?

दुनिया में सबसे पहले इस तरह की प्रणाली की शुरुआत अमेरिका के फेडरल रिजर्व (US Fedwire System) द्वारा 1970 में टेलीग्राफ के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर के रूप में की गई थी, जिसमें RTGS के कई गुण मौजूद थे।

1980 के दशक के मध्य में ब्रिटेन (CHAPS, 1984) और फ्रांस (SAGITTAIRE, 1984) ने आधुनिक स्वरूप वाली प्रणालियाँ विकसित कीं। इसके बाद 1990 के दशक में दुनिया भर के कई केंद्रीय बैंकों ने इसे अपनाया।

भारत में RTGS का इतिहास 

भारत में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 26 मार्च 2004 को पायलट बेसिस पर (शुरुआत में केवल 4 बैंकों के साथ SBI, HDFC, Standard Chartered bank, Aur sarswat cooperative Bank ) RTGS की शुरुआत की गई थी।
इसका मुख्य उद्देश्य देश में बड़े मूल्य (High-Value) के फंड ट्रांसफर को बिना किसी क्रेडिट या सेटलमेंट जोखिम के तुरंत (Real-Time) और सुरक्षित तरीके से एक बैंक से दूसरे बैंक में भेजना था।
शुरुआत में इसके तहत न्यूनतम राशि की सीमा ₹2 लाख तय की गई थी और यह केवल बैंक के कामकाजी घंटों (Working Hours) के दौरान ही उपलब्ध होता था।
 
डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने और ग्राहकों की सुविधा को बढ़ाने के लिए आरबीआई ने 14 दिसंबर 2020 से RTGS सेवा को साल के 365 दिन, सातों दिन और 24 घंटे (24x7x365) उपलब्ध करा दिया।

मुख्य विशेषताएं (Key Features)

 रियल-टाइम (Real-Time):

इसमें भुगतान के लिए कोई इंतजार नहीं करना पड़ता। जैसे ही ट्रांजैक्शन सबमिट होता है, पैसा कुछ ही मिनटों (आमतौर पर कुछ सेकंड से लेकर आधे घंटे के भीतर) में प्राप्तकर्ता के खाते में जमा हो जाता है।आपका पैसा तुरंत आपके एक बैंक के खाते से दूसरे बैंक के खाते में कुछ ही देर में  ट्रांसफर कर दिया जाता है ।

 ग्रॉस सेटलमेंट (Gross Settlement): 

इसका अर्थ है कि हर एक ट्रांजैक्शन का हिसाब अलग-अलग व्यक्तिगत रूप से (One-to-One basis) किया जाता है। इसमें कई लेन-देन को आपस में जोड़ा (Batching) नहीं जाता। मतलब एक ट्रांजैक्शन एक ही होता है और वैसे ही किया जाता है वन तो वन ।

  सीमाएं (Limits):

 RTGS के माध्यम से कम से कम ₹2,00,000 (2 लाख रुपये) या उससे अधिक ही ट्रांसफर कर सकते हैं। इससे कम राशि के लिए NEFT या UPI/IMPS का उपयोग किया जाता है। २०००००/ से कम के लिए NEFT का उपयोग किया जाता है ।

RBI की तरफ से इसकी कोई ऊपरी अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है, हालांकि सुरक्षा और बैंक नियमों के आधार पर अलग-अलग बैंकों की अपनी दैनिक सीमाएं हो सकती हैं।वह आप अपने बैंक से जान सकते है ।

उपलब्धता (Timings):

यह सेवा 24×7, वर्ष के 365 दिन (सप्ताह के सातों दिन, छुट्टियों और रविवार सहित) उपलब्ध है। पहले ऐसा नहीं था , आप सिर्फ बैंकिंग के समय में ही , RTGS कर सकते थे । NetBanking से आप  ऑनलाइन RTGS कभी भी कर सकते है । ध्यान  रखे बैंकों के अपने ट्रांजैक्शन लिमिट होते है सुरक्षा के लिए , अधिकतम सीमा निर्धारित की जाती है ।

शुल्क और चार्ज (Charges)

RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार, ऑनलाइन माध्यम से किए जाने वाले RTGS ट्रांजैक्शन आम तौर पर निःशुल्क (Free) होते हैं।अपने बैंक से या बैंक के वेबसाइट से NEFT/RTGS  चार्ज के बारे में अवश्य जान लीजिए ।

  यदि आप बैंक शाखा में जाकर फॉर्म भरकर RTGS करवाते हैं, तो बैंक नियमों के अनुसार मामूली शुल्क (₹25 से ₹50 तक + जीएसटी) लग सकता है। बैंकों में RTGS/ NEFT का लगभग एक ही फॉर्म होता है , जो आपको भरकर चेक जोड़कर देना होता है ।

RTGS करने के लिए आवश्यक विवरण

यदि आप किसी को RTGS के जरिए पैसे भेजना चाहते हैं, तो आपके पास निम्नलिखित जानकारियां होनी चाहिए:

 * प्राप्तकर्ता का नाम (Beneficiary Name)

 * बैंक खाता संख्या (Account Number)

 * खाते का प्रकार (Savings/Current Account)

 * बैंक का IFSC कोड (IFSC Code)

 * बैंक की शाखा का नाम (Branch Name)

यह जानकारी ले कर आप ऑनलाइन या ऑफलाइन अपने बैंक में जाकर फॉर्म भरकर ट्रांजैक्शन कर सकते है , एक बात का अवश्य ध्यान रखें  जानकारी पहले पक्का कर ले , कि सही है कि नहीं , नहीं तो एक बार अगर गलत अकाउंट में पैसा चला गया ,तो वापस लाना बहुत कठिन होता है । इसलिए आप किसी से अकाउंट नंबर जब लेते है तो उसके चेक का  या पासबुक का  फोटो मांग सकते है , ताकि बाद में परेशानी न हो ।RTGS/ NEFT में मुख्य अंतर इतना ही है कि  NEFT १ रुपए का भी किया जा सकता है , और RTGS कम से कम २०००००/ का होना चाहिए। NEFT पहुंचने  मे RTGS से ज्यादा समय लगता है क्योंकि वो आधे आधे घंटे के बैच में होता है और RTGS सीधा हो जाता है । मैं आशा करता हु कि आप NEFT और RTGS अच्छे से समझ गए होगे , और अगली बार जब neft या RTGS करने जाएंगे , तो आपको उसके बारे में सब कुछ पता होगा । यह लेख पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद ।

धन्यवाद।

NEFT कैसे काम करता है ?

 

NEFT (National Electronic Funds Transfer) 


NEFT
NEFT



NEFT का पूरा नाम National Electronic Funds Transfer (राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर) है। यह भारत में एक राष्ट्रव्यापी भुगतान प्रणाली है, जिसकी मदद से कोई भी व्यक्ति या संस्था एक बैंक खाते से देश के किसी अन्य बैंक खाते में सुरक्षित रूप से ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर सकती है। जब आप एक बैंक के खाते से दूसरे बैंक के खाते में पैसा ट्रांसफर करते है तो वो NEFT  या RTGS से होता है , पिछले लेखों में हमने विभिन्न प्रकार के अकाउंट जैसे बचत खाता , चालू खाता, डिपॉजिट  स्कीम्स , PPF इत्यादि के बारे में विस्तार से चर्चा की , अब हम पैसा एक बैंक से दूसरे बैंक में किस प्रकार भेजा जाता है , उसके विषय में विस्तार से जानेंगे , आइए अब हम सबसे पहले  ये जानते है कि NEFT  और RTGS से पहले यह कम कैसे होता था ।  हम शुरुवात इतिहास से करते है  ,आपने NEFT के बारे में अवश्य सुना होगा , जब आप बैंक में जाते है NEFT करने , बैंक आपको एक फॉर्म दे देता है , और आप भर कर उसके साथ चेक जोड़कर  दे देते है , और आपका पैसा कुछ ही देर में दूसरे बैंक में पहुंच जाता है , पर पहले ये सब इतना आसान नहीं था , आइए अब हम सबसे पहले समझते है पहले यह प्रक्रिया कैसे काम करती थी ।

NEFT और RTGS (जो कि 2000 के दशक के मध्य में आए) से पहले, भारत में एक बैंक से दूसरे बैंक में पैसे ट्रांसफर करना काफी लंबा और कागजी प्रक्रिया वाला काम था। उस समय मुख्य रूप से निम्नलिखित तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था:

1. डिमांड ड्राफ्ट (Demand Draft - DD)

डिमांड ड्राफ्ट या डीडी कभी न कभी तो आप ने अवश्य बनवाया होगा , किसी न किसी काम के लिए , पहले वह एक माध्यम था एक बैंक से दूसरे बैंक में पैसा देने के लिए ,  जिस व्यक्ति को पैसे भेजने होते है , वह अपने बैंक जाता है  और एक 'डिमांड ड्राफ्ट' फॉर्म भरकर उतनी राशि (प्लस बैंक का कमीशन) जमा करता है , और बैंक उसको DD दे देता है , और उसे  जहां जमा करना होता है , वहां जमा कर देता है , इसका इस्तेमाल आज भी बहुत सारे काम जैसे फीस जमा करना , फॉर्म भरना , लोन का पैसा देना, टेंडर  इत्यादि के लिए होता है , पर पहले यही एक माध्यम होता था , आज भी डिमांड ड्राफ्ट का इस्तेमाल  होता है क्योंकि ये कभी बाउंस नहीं होते  इसे कैश की तरह ही समझा जाता है ।

2. चेक (Cheques) और क्लियरिंग हाउस (Clearing House)

आज भी चेक का इस्तेमाल होता है , पर आज चेक एक ही दिन में क्लियर हो जाता है , पहले ऐसा नहीं होता था , लोग एक-दूसरे को अकाउंट पेयी चेक (Account Payee Cheque) देते थे, पाने वाला व्यक्ति चेक को अपने बैंक खाते में जमा करता था। बैंक उस चेक को क्लियरिंग हाउस (Clearing House) में भेजते थे, जहां विभिन्न बैंकों के कर्मचारी आपस में भौतिक चेक का आदान-प्रदान करके हिसाब किताब करते थे इस प्रक्रिया में भी आमतौर पर 3 से 7 कार्य दिवसों (Working Days)  या कभी कभी बाहर का चेक होता था तो इससे भी ज्यादा  का समय लग जाता था। आपने भी कभी न कभी किसको तो चेक जारी किया ही होगा ।

3. टेलीग्राफिक ट्रांसफर (Telegraphic Transfer - TT)

यह मुख्य रूप से बड़े व्यावसायिक लेन-देन या बैंक की अपनी शाखाओं के बीच तत्काल पैसे भेजने का एक पुराना तरीका था ,इसमें एक बैंक शाखा दूसरी बैंक शाखा को टेलीग्राफ या फैक्स (Fax) के जरिए एक अधिकृत संदेश भेजती थी, जिसके आधार पर दूसरी शाखा पैसे का भुगतान करती थी। हालांकि, यह आम जनता के लिए बहुत महंगा और जटिल था। यह आम जनता कम ही इस्तेमाल करती थी , बड़े व्यापारी जिसको रोज लेन देन करना होता था वहीं इस्तेमाल करते थे ।

4. मेल ट्रांसफर (Mail Transfer - MT)

यह डिमांड ड्राफ्ट का ही एक रूप था, लेकिन इसमें एक बैंक शाखा सीधे दूसरी शहर की बैंक शाखा को डाक (Mail) के जरिए पत्र भेजकर भुगतान करने का निर्देश देती थी। इसमें भी काफी समय लगता था। इसके फॉर्म होते थे जो भर कर भेजे जाते थे ।
अब ये सब पुराने जमाने की बात लगती है , लेकिन इतिहास जानने के लिए यह बताना आवश्यक था , अब आप समझ गए होगे आज का जीवन कितना आसान हो गया है ।

इन पुरानी प्रणालियों में कागजी कार्रवाई बहुत ज्यादा होती थी, मैन्युअल गलतियों की गुंजाइश रहती थी और पैसों के ट्रांसफर में कई दिन लग जाते थे।पहले बैंक का इस्तेमाल  बहुत कम लोग करते थे , आम आदमी कैश से ही काम कर लेता था। NEFT और RTGS जैसे टेक्नोलॉजी  के आने से यह  प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल  और बहुत आसान बना दिया और कुछ ही मिनटों या घंटों में आपका काम हो जाता है ।

क्या आप जानते है ?

NEFT (National Electronic Funds Transfer) का इतिहास भारत की डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय सुधारों का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा खुदरा भुगतान (Retail Payments) को तेज, सुरक्षित और कागज-मुक्त बनाने के लिए लाया गया था।

NEFT के विकास और सफर के मुख्य ऐतिहासिक पड़ाव निम्नलिखित हैं:

 शुरुआत से पहले की व्यवस्था (SEFT)

NEFT से पहले, RBI ने नवंबर 2001 में SEFT (Special Electronic Funds Transfer) की शुरुआत की थी। यह चुनिंदा शहरों और चुनिंदा बैंकों की शाखाओं के बीच ही काम करती थी। इसकी सीमाएं बहुत थीं और यह देशव्यापी नहीं थी, इसलिए इसे एक व्यापक और बेहतर प्रणाली से बदलने की जरूरत महसूस हुई।

 NEFT की आधिकारिक शुरुआत (नवंबर 2005)

पुरानी SEFT प्रणाली को पूरी तरह से बंद करके RBI ने नवंबर 2005 में आधुनिक NEFT प्रणाली की शुरुआत की। इसका मुख्य उद्देश्य देश के किसी भी कोने से एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक तरीके से आसानी से पैसे ट्रांसफर करना था।

 बैच प्रोसेसिंग (Batch System) का दौर

शुरुआत में NEFT तुरंत (Real-Time) पैसे ट्रांसफर नहीं करता था। यह बैच (Batch) के आधार पर काम करता था। शुरुआत में दिनभर में इसके कुछ ही तय समय (बैच) होते थे मुश्किल से ६ या ७ बैच होते थे दिन भर में । जैसे-जैसे डिजिटल लेन-देन बढ़ने लगे, RBI ने बैचों की संख्या बढ़ाई और बाद में इसे घटाकर आधे-आधे घंटे (Half-hourly batches) का कर दिया गया, जिससे ग्राहकों को दिनभर में कई बार जल्दी पैसे ट्रांसफर होने की सुविधा मिलने लगी।

 24x7x365 उपलब्धता (दिसंबर 2019)

डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए RBI ने 16 दिसंबर 2019 से NEFT सेवा को साल के सातों दिन, 24 घंटे और छुट्टियों के दिन भी चालू कर दिया। इसके बाद से ग्राहकों को बैंक के कामकाजी घंटों या छुट्टियों का इंतजार करने की जरूरत खत्म हो गई।

बेनिफिशरी नेम वेरिफिकेशन (अक्टूबर 2024):
सुरक्षा को और मजबूत करने और फ्रॉड रोकने के लिए RBI ने इसमें खाताधारक का नाम सत्यापित करने की सुविधा अनिवार्य कर दी, ताकि पैसे ट्रांसफर करते समय असली नाम दिखाई दे सके। आज आप दूसरे बैंक का अकाउंट भी वेरिफाई कर सकते है ।

आज NEFT भारत की भुगतान प्रणालियों (जैसे UPI और RTGS) के साथ मिलकर देश की अर्थव्यवस्था की एक मजबूत और भरोसेमंद नींव बन चुका है।



NEFT कैसे काम करता है? 

NEFT प्रणाली बैच (Batch) के आधार पर काम करती है, यानी पैसे तुरंत एक खाते से दूसरे खाते में सीधे ट्रांसफर नहीं होते, बल्कि यह एक तय समय अंतराल में समूह बनाकर प्रोसेस होते हैं। आइए पूरे प्रक्रिया को विस्तार से समझते है ।

 १. विवरण दर्ज करना:

 पैसे भेजने वाले को इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग ऐप में पाने वाले (Beneficiary) का नाम, खाता संख्या (Account Number), बैंक का IFSC कोड, और ट्रांसफर की जाने वाली राशि दर्ज करनी होती है। जब आप बैंक में फॉर्म भर कर देते है , या अपने इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग से  पाने वाले का नाम , अकाउंट नंबर, ifsc code , और  धन राशि भरते है ।
 जब आप NEFT का अनुरोध भेजते हैं, तो आपका बैंक उस ट्रांजैक्शन को अपने सिस्टम में दर्ज करता है। आप फॉर्म जमा कर के आ जाते है  या अपने NetBanking या मोबाइल बैंकिंग से submit पर क्लिक करते है , तब बैंक अपने cbs में ट्रांजैक्शन डिटेल दर्ज करता है ।

 बैच प्रोसेसिंग:

 RBI द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार, NEFT ट्रांजैक्शन आधे-आधे घंटे के बैच (Batches) में प्रोसेस किए जाते हैं। यानी दिनभर में हर 30 मिनट पर एक नया बैच बनता है जिसमें उस समयावधि के सभी ट्रांसफर शामिल होते हैं।
 सभी  बैंकों के अनुरोध नेशनल क्लियरिंग सेंटर (जो कि RBI के पास है) पर जाते हैं, जहां बैंकों के बीच पैसों का मिलान और निपटान (Settlement) होता है। सभी बैंकों के सारे ट्रांजैक्शन एक स्थान पर इकट्ठा किए जाते है , और बैंक के अनुसार  डेबिट क्रेडिट फाइनल किया जाता है । सभी बैंकों को अपने ट्रांजैक्शन के अनुसार पैसे ट्रांसफर कर दिए जाते है ।
सभी बैंकों के अपने NEFT/RTGS cell होते है जो इस प्रक्रिया को पूरा करने में भागीदारी निभाते है ।
 
सेटलमेंट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, पाने वाले (Beneficiary) के बैंक खाते में  उस बैंक द्वारा पैसे जमा कर दिए जाते हैं और भेजने वाले को एसएमएस या ईमेल के जरिए पुष्टि मिल जाती है। संबंधित बैंक अपनी लिस्ट के अनुसार लोगों को पैसे उनके अकाउंट में जमा कर देते है ।

यह सब काम सिस्टम से होता है , इसलिए समय बहुत कम लगता है , और आपको पता नहीं चलता इतना जल्दी इतने ट्रांजैक्शन कंप्लीट हो जाते है ,और अगर किसी के डिटेल्स गलत हो तो पैसा भेजने वाले के  अकाउंट में वापस कर दिया जाता है ।

NEFT की मुख्य विशेषताएँ:


 NEFT सेवा साल के सातों दिन, 24 घंटे और छुट्टियों के दिन भी उपलब्ध है। आप किसी भी समय पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। इसका टाइम भी बैंक के हिसाब से अलग अलग निर्धारित कर सकते है , आपके बैंक का टाइम पता लगा सकते है आप।

 NEFT के जरिए आप कम से कम (जैसे 1 रुपया) से लेकर कितनी भी बड़ी राशि ट्रांसफर कर सकते हैं (हालांकि अलग-अलग बैंक अपनी तरफ से दैनिक सीमा तय कर सकते हैं)।
 
RBI के सुरक्षित नेटवर्क पर काम करता है, और इसमें बेनिफिशरी का नाम वेरीफाई करने की सुविधा पहले नहीं मिलती थी अभी कुछ महीने पहले शुरू की गई है। 

NEFT पर चार्ज कितना होता है ?

यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप पैसे कैसे ट्रांसफर कर रहे हैं।
1. ऑनलाइन NEFT (इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप):
 पूरी तरह मुफ्त (Free)
 यदि आप अपने सेविंग अकाउंट (बचत खाता) से मोबाइल बैंकिंग, नेट बैंकिंग या बैंक के ऐप के जरिए खुद ऑनलाइन NEFT करते हैं, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार अधिकांश बैंक कोई शुल्क नहीं लेते हैं। लेकिन अपने बैंक के चार्जेज अवश्य पता कर ले ।

 यदि आप बैंक की शाखा (Branch) में जाकर फॉर्म भरकर NEFT करवाते हैं, तो बैंक उस पर शुल्क (Service Charge) वसूलते हैं।
 यह शुल्क ट्रांसफर की जाने वाली राशि के स्लैब (Slab) के हिसाब से अलग-अलग होता है। जैसे:
   * 10,000 रुपये तक: लगभग ₹2.50 से ₹5 + GST
   * 10,000 से 1 लाख रुपये तक: लगभग ₹5 से ₹10 + GST
   * 1 लाख से 2 लाख रुपये तक: लगभग ₹15 से ₹25 + GST
   * 2 लाख रुपये से अधिक: लगभग ₹25 से ₹50 + GST

अगर कोई दूसरा व्यक्ति आपके खाते में NEFT के जरिए पैसे भेजता है, तो पैसे प्राप्त करने पर (Inward Credit) बैंक कोई चार्ज नहीं काटते हैं।

सलाह: हमेशा मोबाइल या नेट बैंकिंग के जरिए ही NEFT करें, ताकि आप अतिरिक्त ब्रांच चार्ज से बच सकें। NEFT करने से पहले अपने बैंक के charges अवश्य जान ले ।

इस लेख में हमने NEFT से जुड़ी सभी विषयों पर चर्चा करने का प्रयास किया । अगली बार आप जब NEFT करने जाएंगे तो आपको उसके बारे में सब कुछ जानकारी होगी । यह लेख पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद ।
धन्यवाद।