(SCSS)सीनियर सिटीज़न सेविंग स्कीम

सीनियर सिटीज़न सेविंग स्कीम (SCSS): वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित निवेश और शानदार रिटर्न


SCSS benefits
Benefits of SCSS


सीनियर सिटीज़न सेविंग स्कीम (SCSS) भारत सरकार की एक बेहद लोकप्रिय और सुरक्षित छोटी बचत योजना है, जो विशेष रूप से सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) और वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाई गई है। आज के समय में कहा जाए कि सरकारी बैंक FD  पर कितना इंटरेस्ट देते है , तो आप कहेंगे कि ज्यादा से ज्यादा 7% , पर उसके विपरीत सिर्फ SCSS  ही एक एडी स्कीम है जो सबसे ज्यादा ब्याज  देती  8.20%  इंटरेस्ट  देता है , इस तरह यह सबसे ज्यादा ब्याज देने वाली  SCHEME  कह सकते है । यह भारत सरकार द्वारा मुख्य रूप से ६० साल के ऊपर के लोगों के लिए  बनाया गया है , ताकि आप  रिटायर होने के बाद अपना पैसा सुरक्षित , और ज्यादा ब्याज के साथ रख सके । पिछले लेखों में हमने FD , RD, और  PPF के बारे में विस्तार से जाना , PPF भी  एक सरकारी योजना है सबके लिए । अगर आप  इनके   बारे में पढ़ना चाहते है तो यहां PPF , FDR, RD पर  CLICK  कर के पढ़ सकते है , उसके बाद आप SCSS को भी अच्छे से समझ पाएंगे ।  आइए अब हम इसे और अच्छे तरीके से समझने का प्रयास करते है ।

क्या आप जानते है ?

SCSS के आने से पहले बुजुर्गों के लिए 'Senior Citizens Deposit Scheme, 1993' जैसी कुछ अन्य योजनाएं थीं। सरकार ने पुरानी व्यवस्थाओं को और अधिक आकर्षक, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए इस नई और उन्नत योजना को पेश किया।

Senior Citizen Savings Scheme (SCSS) की शुरुआत भारत सरकार द्वारा वर्ष 2004 में की गई थी। 2004 में इसे लाया गया था ।

इस योजना को शुरू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य देश के वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) को रिटायरमेंट के बाद एक सुरक्षित, निश्चित और नियमित आय (Regular Income) का स्रोत प्रदान करना था।

इसे भारत सरकार के पोस्ट ऑफिस सेविंग्स नेटवर्क (India Post) और अधिकृत कमर्शियल बैंकों के माध्यम से लॉन्च किया गया था, ताकि देश के बुजुर्ग आसानी से इसका लाभ उठा सकें।

 सबसे पहले  अगर आप रिटायरमेंट के बाद किसी से  , पूछते है कि पैसा कहा इन्वेस्ट करना  है  ? तो , यह जवाब अवश्य आता है कि SCSS , इस योजना के  बहुत सारे फायदे है , और यह वरिष्ठ नागरिकों में  बहुत लोकप्रिय है , अब हम  इस योजना से जुड़ी मुख्य  बातों पर चर्चा करेंगे :

ब्याज  कितना मिलेगा ?

सबसे पहला  सवाल होता है , ब्याज कितना है ? वर्तमान  मतलब अगस्त , 2026 में इस योजना पर 8.2% प्रति वर्ष की दर से ब्याज मिल रहा है, जिसकी समीक्षा सरकार द्वारा हर तिमाही (Quarterly)  या हर तीन महीने में की जाती है। एक बार खाता खुलने पर यह ब्याज दर पूरे कार्यकाल (5 साल) के लिए लॉक हो जाती है। मतलब अगर बीच में बदल भी जाए तो आपका ब्याज दर 8.20 % ही रहेगा 5 साल तक ।

क्या आप जानते है ?

अगस्त 2004 में जब योजना शुरू हुई, तब से लेकर मार्च 2012 तक ब्याज दर 9.0% पर स्थिर रही थी ।

2012-13: 9.30%

2013-2015: 9.20%

2015-2016: बढ़ाकर फिर से 9.3% कर दी गई थी ।

सरकार ने तिमाही समीक्षा के आधार पर दरों में धीरे-धीरे कटौती करना शुरू किया। वर्ष 2016 से 2019 के बीच यह दर घटकर 8.3% से 8.7% के बीच रही।

इसके बाद वर्ष 2020 की शुरुआत में यह घटकर 8.6% और फिर कोविड काल के दौरान गिरकर सीधे 7.4% पर आ गई 

ब्याज दरों में सुधार हुआ और यह बढ़कर 7.4% से 7.6% और फिर 8.0% तक पहुँची ।

अप्रैल 2023 से यह दर स्थिर रूप से 8.2% पर बनी हुई है और वर्तमान तिमाही में भी यही लागू है।

अधिकतम ब्याज दर  9.30%  और न्यूनतम ब्याज दर 7.40 %  तक गई  है । इससे आप जान सकते है कि समय के साथ उतार - चढ़ाव  समय समय पर होता रहता है , लेकिन एक बार आप जिस समय SCSS में पैसा जमा करते है , वही ब्याज 5 साल तक रहता है ?

ब्याज  कैसे मिलेगा  ?

इसका ब्याज हर तिमाही (हर 3 महीने में - अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी के पहले दिन) सीधे निवेशक के बैंक खाते में जमा किया जाता है। इसका ब्याज आप  अपने बचत खाता में ले सकते है । इसमें एक बात ध्यान रखे , मान लीजिए आप ने खाता 1  मार्च को   खोला तो , आपका पहला  ब्याज  अप्रैल में जमा होगा 1 तारीख को , लेकिन वो ३ महीने का नहीं बल्कि 1 महीने का होगा  क्योंकि आपने SCSS  में पैसा  ब्याज मिलने की तारीख से एक महीने पहले खोला है ,ब्याज मिलने का महीने और तारीख का समय हमेशा एक ही रहता है ,  उसके बाद फिर अगला जुलाई में और 3-3 महीने पर जमा होता रहेगा  । मतलब आप जब भी पैसा जमा करते है , तो सबसे पहले ब्याज आपको अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी के 1 तारीख को मिलेगा , आपने जब खाता खोला उसके आधार पर , उसके बाद हर 3 महीने में मिलता रहेगा |

कितने दिन के लिए जमा  होता है ?

इस योजना का मैच्योरिटी पीरियड 5 वर्ष है। इसे पूरा होने के बाद एक बार में केवल 3 साल के लिए और बढ़ाया जा सकता है। ५ साल का term period होता है , उसके बाद केवल एक बार ३ साल के लिए बढ़ा सकते है  फिर मैच्योर हो जाता है।, लेकिन फिर से आप ५ साल के लिए नया कर सकते है । मतलब कम से कम 5 साल तक रखा जा सकता है |

कितना जमा कर सकते है ?

 न्यूनतम निवेश: ₹1,000

 अधिकतम निवेश: ₹30 लाख (व्यक्तिगत या संयुक्त खाते में)

पहले इसमें  1500000/-  ही जमा किए जा सकते थे , अब बढ़ाकर  3000000/ कर दिया गया है , संयुक्त मतलब अलग अलग बैंक के  मिलाकर टोटल  रकम 3000000/- से ज्यादा नहीं हो सकती । आपके पास अगर  1000/- भी है तो आप SCSS  में जमा कर सकते है | एक बात ध्यान  रखने की है कि अलग अलग बैंक , मतलब आप दो अलग  अलग बैंकों में 1500000/- और 1500000/- रख सकते है |

कौन SCSS   खाता खोल  सकता है ?

कोई भी  60 वर्ष या उससे अधिक आयु का  भारतीय नागरिक। 

55 से 60 वर्ष की आयु के वे कर्मचारी जो वीआरएस (VRS) या सुपरएनुएशन ले चुके हैं (बशर्ते रिटायरमेंट लाभ मिलने के 1 महीने के भीतर खाता खोला गया हो)। आपको रिटायरमेंट का डॉक्यूमेंट बैंक में दिखाना होता है और आपके रिटायरमेंट के एक महीने के भीतर ये खाता अवश्य खोल ले |

रक्षा सेवा (Defense) से रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए आयु सीमा 50 वर्ष है। यहां भी आपको डॉक्यूमेंट दिखाना होता है , तब बैंक आपका SCSS चालू कर देता है । रिटायर होने के तुरंत बाद अवश्य SCSS में पैसा जमा कर दे, नहीं तो फिर 60 साल तक इंतजार करना पड़ेगा |

कौन SCSS नहीं कर सकता हैं ?

हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) और एनआरआई (NRI) इस योजना के पात्र नहीं हैं।

जिसकी आयु ६० साल से कम हो , वह SCSS में पैसा जमा नहीं कर सकता। 

क्या ज्वाइंट अकाउंट  खोला जा सकता है ?

हां, सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) के तहत ज्वॉइंट अकाउंट खोला जा सकता है, लेकिन इसके कुछ विशेष नियम हैं:
 1.  SCSS में आप केवल अपने   पति या पत्नी (Spouse)  के साथ ही ज्वॉइंट अकाउंट खोल सकते हैं। अन्य किसी रिश्तेदार या व्यक्ति के साथ ज्वॉइंट खाता खोलने की अनुमति नहीं है।
 2.   ज्वॉइंट अकाउंट में मुख्य या पहला नाम उसी व्यक्ति का होना चाहिए जो SCSS की पात्रता (जैसे 60 वर्ष या उससे अधिक की आयु, या तय नियमों के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारी) को पूरा करता हो।
 3.  ज्वॉइंट खाते में जमा की जाने वाली पूरी राशि केवल  पहले खाताधारक   की ही मानी जाती है।
 4.  खाताधारक की आयु 60 वर्ष होने पर, यदि उनके जीवनसाथी की आयु 60 वर्ष से कम भी है, तब भी उन्हें ज्वॉइंट होल्डर बनाया जा सकता है।

कर लाभ (Tax Benefits):

इस योजना में आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत  सिर्फ ₹1.5 लाख तक के निवेश पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है। मतलब आप इसमें कितना भी पैसा डाले 150000/- के ऊपर लेकिन आपको छूट सिर्फ 150000/-  तक ही मिलेगी उस साल में |

इस  पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह कर योग्य (Taxable) है,  जो भी ब्याज मिलेगा उसपर आपको टैक्स देना होगा | एक वित्तीय वर्ष में ब्याज ₹50,000 से अधिक होने पर टीडीएस (TDS) कट सकता है। मतलब अगर आप  600000/ के ऊपर पैसा जमा करते है तो TDS कटेगा। जिसे आप बाद में ITR भर कर वापस ले सकते है ।

समय से पहले निकासी (Premature Closure): 

अगर   आपने ५ साल के लिए रखा और उससे पहले ही आपको पैसे की जरूरत पड़ जाए और बंद करना पड़े तो क्या नियम है ?

खाता खोलने के 1 साल के भीतर बंद करने पर कोई ब्याज नहीं मिलता। अगर १ साल से पहले बंद किया जाए तो उसपर १ रुपए भी ब्याज नहीं मिलता है , इसलिए इसमें सोच समझ कर पैसा डाले जिसकी आपको ५ साल जरूरत नहीं पड़ेगी , वहीं  पैसा उसमें जमा करे । चुकी इस स्कीम पर  तिहामी ब्याज मिलता हैं , इसलिए जब आप जमा करते है ब्याज ३ महीने बाद मिलने लगता है , लेकिन जब आप एक साल से पहले बंद करने जाते है तो यह पैसा आपके मूलधन में से काट लिया जाता है , जो ब्याज आपको दिया गया है उतना । इस लिए  हमेशा अगर आपको 15  लाख जमा करना है तो , 3  SCSS बनाए ५०००००/ के , ताकि अगर कभी जरूरत पड़ जाए तो एक तोड़कर काम हो जाए ।

अगर 1 से 2 साल के बीच बंद करना पड़ा तो आपके   मूलधन  या जितनबा पैसा आपने जमा किया था , का 1.5% काट  लिया जाता है , आइए इस अच्छे से समझते है |  मान लीजिए आपने  1000000/ रखा है  और एक साल के बाद आपको तोड़ने की जरूरत पड़ गई तब  बैंक / पोस्ट ऑफिस   आपका जमा पैसे का  1.5% मतलब  15000/- काट   लेगा  ।

अगर आपको  2 से 5 साल के बीच बंद करना पड़ा तो   1% की कटौती (पेनल्टी) का प्रावधान है ।  अगर 2 साल पूरे हो गए तो 1 % मतलब  10 लाख का 10000/- काट लिया  जाएगा |

इसलिए हमेशा इसमें वही पैसा रखे जिसकी आपको   5 साल में जरूरत  नहीं पड़ेगी । 

क्या लोन मिलता है ?

SCSS पर कोई लोन नहीं ले  सकते आप , ध्यान रखे इसलिए इसमें वही पैसा रखे जिसकी जरूरत आपको ५ साल नहीं लगेगी , अगर  लोन  चाहिए तो आप बैंक FD कर सकते है , जिसपर आप कभी भी 90 % तक  लोन ले सकते है ।  अपना पैसा अलग अलग बाट कर जमा करे , थोड़ा FD, कुछ PPF और SSC , इससे आपको  जरूरत पड़ने पर दिक्कत नहीं होगी।

SCSS कहा खोला जा सकता है ?

आप देश के किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (Public Sector Bank) या चुनिंदा निजी बैंकों (Private Banks) में SCSS (Senior Citizen Savings Scheme)  खाता खुलवा सकते हैं। 
भारत के किसी भी पोस्ट ऑफिस या डाकघर में SCSS अकाउंट आसानी से खोला जा सकता है। आपका  जिस भी बैंक में अकाउंट हो  वहां आप  अकाउंट खोल सकते है |

सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम खोले के लिए क्या क्या आवश्यक है ?

सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) के तहत खाता खोलने के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों और औपचारिकताओं की आवश्यकता होती है:
 1. SCSS खाता खोलने का फॉर्म (Account Opening Form)   बैंक या पोस्ट ऑफिस से मिलने वाला निर्धारित आवेदन फॉर्म।
 2. पहचान प्रमाण (Identity Proof):    पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी, या पासपोर्ट में से कोई एक।
 3. पते का प्रमाण (Address Proof):   आधार कार्ड, बिजली बिल, राशन कार्ड, या पासपोर्ट।
 4. बआयु प्रमाण (Age Proof):  
  •  60 वर्ष या उससे अधिक आयु के सामान्य नागरिकों के लिए (आधार कार्ड, पैन कार्ड, या जन्म प्रमाण पत्र)।
  •   55 से 60 वर्ष की आयु वाले सेवानिवृत्त रक्षा कर्मचारियों (Defense Employees) के लिए रिटायरमेंट का प्रमाण और आयु प्रमाण।
  •  50 से 60 वर्ष की आयु वाले अन्य सरकारी कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट और पेंशन से जुड़े दस्तावेज।
  •   पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ: खाताधारकों की हाल ही में खींची गई तस्वीरें (ज्वॉइंट अकाउंट होने पर दोनों की)।
  •  पैन कार्ड (PAN Card)   निवेश और टीडीएस (TDS) उद्देश्यों के लिए अनिवार्य।
 5. आरंभिक राशि:    खाता खोलने के लिए न्यूनतम 1,000 रुपये या उससे अधिक की चेक/नकद राशि (निवेश अधिकतम 30 लाख रुपये तक हो सकता है)।

हमने SCSS ( सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम) के बारे में लगभग सभी विषयों पर चर्चा करने का प्रयास किया , अब एक बात  जान लेते है चार्ट के माध्यम से की  आप कितना पैसा रखेंगे 8.20 % रेट से तो 5 साल में कितना होता है , आइए देखते है |

SCSS interest chart
इस चार्ट में हम देख  सकते है कि , 5 साल में कितना  ब्याज quarterly और 5 साल में  जोड़कर  कितना होता है , इस से आप अंदाजा लगा सकते है , कि SCSS सीनियर  लोगो  के लिये  काफी अच्छा है , कुछ पैसा तो इसमें  जरूर  रखना चाहिए | इस लेख को पढ़ने के बाद  मैं आशा करता हु आप SCSS अच्छे से  समझने लगे होगे | इस लेख  को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद |

धन्यवाद |



BHIM क्या है ?

BHIM (Bharat Interface for Money)



Benefits of Bhim App
Benefits of Bhim 


BHIM (भीम) ऐप भारत सरकार की एक डिजिटल भुगतान सेवा है, जो यूपीआई (UPI) तकनीक पर काम करती है ,  इसे दिसंबर 2016 में लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य देश में कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देना है। पिछले लेख में हमने UPI से संबंधित  बहुत सारे  विषयों पर चर्चा की , UPI क्या  है , किसने बनाया और कैसे कम करता है , इस लेख के पढ़ने से पहले  वह लेख अवश्य पढ़ ले UPI पर लेख पढ़ने के लिए  यहां CLICK करे | हमने  UPI से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण तथ्यों पर चर्चा की है , आइए अब हम उनमें से एक ऐप जो सबसे पहले NPCI , ने बनाया था UPI के द्वारा लेन देन   करने के लिए , एक बात अवश्य जान ले कि  BHIM ही एक ऐसा ऐप है जो स्वयं NPCI , यानी जिसने UPI बनाया उसका है , बाकी सब अलग  अलग कंपनियों ने UPI का इस्तेमाल करके बनाया है  , इसलिए  जहां तक संभव हो आप BHIM का इस्तेमाल करे| आइए  अब हम भीम ऐप  पर चर्चा करते है | क्या आप भीम ऐप इस्तेमाल करते ?

BHIM ऐप की मुख्य विशेषताएं

सुरक्षित और सीधा लेनदेन 

यह ऐप सीधे बैंक खाते से बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा देता है। इसमें किसी डिजिटल वॉलेट में पैसे लोड करने की आवश्यकता नहीं होती। सीधे आपके बैंक खाते से दूसरे के खाते में पैसा तुरंत ट्रांसफर होता है , बीच में कोई THIRD  Party नहीं होता , यह सीधे बैंक के अकाउंट से लिंक होकर काम करता है |

कई भाषाओं का समर्थन 

यह ऐप हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 15 से अधिक भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है, जिससे देश के किसी भी हिस्से के लोग इसे अपनी मातृभाषा में आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रमुख भाषाएं इस प्रकार हैं:
 हिंदी और  अंग्रेजी ,तमिल (Tamil) ,तेलुगु (Telugu), कन्नड़ (Kannada),मलयालम (Malayalam),मराठी (Marathi),गुजराती** (Gujarati),बंगाली** (Bengali) ,पंजाबी** (Punjabi), अड़िया/उड़िया(Odia), असमिया (Assamese) ,उर्दू (Urdu) ,संस्कृत(Sanskrit),कोंकणी(Konkani),मणिपुरी(Manipuri),बोडो(Bodo),डोगरी (Dogri) ,मैथिली(Maithili) ,संथाली (Santali,सिंधी(Sindhi)|  यह एक ऐसा ऐप है जो इतनी भाषाएं में आप इस्तेमाल  कर सकते  है |

विभिन्न भुगतान के तरीके

आप यूपीआई आईडी (VPA), मोबाइल नंबर, क्यूआर कोड (QR Code) स्कैन करके या सीधे बैंक खाता संख्या और IFSC कोड के जरिए पैसे भेज सकते हैं। आप इन  कई  तरीकों से अपना पैसा भेज सकते है |


विशेष आधुनिक फीचर्स (BHIM 3.0)  

इसमें स्पिट एक्सपेंस (दोस्तों या परिवार के बीच खर्च बांटना), फैमिली मोड, खर्च का विश्लेषण (Spend Analytics Dashboard) और बिना इंटरनेट या कम नेटवर्क में भी काम करने जैसी एडवांस सुविधाएं जोड़ी गई हैं।

छोटे भुगतानों के लिए UPI लाइट 

₹500 तक के छोटे भुगतानों के लिए बिना पिन (PIN-less) के तुरंत भुगतान की सुविधा मिलती है। इसे आप अपने ऐप से चालू कर सकते है | आप इसमें अपना क्रेडिट कार्ड भी जोड़ सकते है ।

लेन-देन की सीमा (Transaction Limits)

आप BHIM ऐप के जरिए प्रति दिन अधिकतम ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) तक का ट्रांजेक्शन कर सकते हैं| पहले ट्रांजेक्शन लिमिट कम थी , पर आज आप एक दिन में 100000/- तक ट्रांजेक्शन  कर सकते है |

ऐप पहली बार इंस्टॉल करने के शुरुआती 24 घंटों के लिए ट्रांजेक्शन लिमिट ₹5,000 होती है, जो 24 घंटे बाद बढ़कर ₹1 लाख हो जाती है।

कैशबैक और रिवार्ड

​भीम ऐप समय-समय पर (जैसे अपनी सालगिरह या विशेष त्योहारों पर) 100% तक कैशबैक (जैसे छोटे लेनदेन जैसे ₹20 खर्च करने पर पूरा कैशबैक) जैसे खास ऑफर्स अपने यूजर्स के लिए लाता रहता है। यह कैश बैक सीधे आपके अकाउंट में तुरंत क्रेडिट होता  है |

BHIM ऐप से जुड़ी कुछ मुख्य बातें 


1.  इसे सीधे भारत सरकार के अंतर्गत NPCI (National Payments Corporation of India) द्वारा विकसित किया गया है। इसलिए यह गवर्नमेंट ऐप है |
2.  यह पूरी तरह से विज्ञापन-मुक्त (Ad-free) है। इसमें कोई थर्ड-पार्टी ऑफर्स, लोन के विज्ञापन या कैशबैक के लिए अनचाहे फीचर्स नहीं होते।
3. इसका इंटरफेस बहुत ही सरल, हल्का (Lightweight) और सीधा है, जिसे इस्तेमाल करना बेहद आसान है।
4. ​चूँकि भीम ऐप को NPCI द्वारा सीधे बनाया गया है, इसलिए इसे सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित प्लेटफॉर्म माना जाता है क्योंकि इसमें बीच में कोई प्राइवेट वॉलेट या बिचौलिया नहीं होता।

इस लेख में हमने बहुत कुछ जाना , यदि और जानना है तो आप  भीम ऐप के official वेबसाइट के लिए यहां  click कर सकते है।

 हमेशा किसी भी नए आदमी को पैसा अगर  अकाउंट या मोबाइल नंबर से भेजना है तो , सबसे पहले आप १ रुपए भेज कर अवश्य चेक कर ले, ताकि आपका पैसा किसी गलत अकाउंट में न जाए । सभी सावधानी के बावजूद अगर  आप का पैसा भीम ऐप में फंस जाता है तो आपको शिकायत  कैसे दर्ज  करना है , आइए अब इस महत्वपूर्ण बात को समझते है , अगर आप  कभी ट्रांजैक्शन कर रहे है, और पैसा डेबिट हो जाता है और  सामने वाले के अकाउंट में क्रेडिट नहीं होता तो क्या करे ?

BHIM App में ट्रांजैक्शन या किसी अन्य समस्या के लिए शिकायत दर्ज करने के दो मुख्य तरीके हैं: ऐप के अंदर (In-app) और एनपीसीआई (NPCI) पोर्टल के माध्यम से।

BHIM ऐप खोलें और Transaction History (लेन-देन इतिहास) पर जाएं।

उस संबंधित ट्रांजैक्शन को चुनें जिसमें समस्या है।

Report Issue या Raise Complaint विकल्प पर क्लिक करें।

अपनी समस्या का कारण चुनें (जैसे- पैसा कट गया लेकिन प्राप्तकर्ता को नहीं मिला) और सबमिट करें।

NPCI पोर्टल के माध्यम से (DigiSaathi / NPCI Dispute Portal):

NPCI की आधिकारिक वेबसाइट npci.org.in पर जाएं या सीधे DigiSaathi (disputeredressal.npci.org.in) पोर्टल का उपयोग करें।

Dispute Redressal Mechanism (DRM) सेक्शन में जाएं।

'UPI' विकल्प चुनें और Transaction ID, UPI ID, बैंक का नाम, और ट्रांजैक्शन की तारीख दर्ज करके शिकायत दर्ज करें।

टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर:

आप NPCI की यूपीआई हेल्पलाइन नंबर 1800-120-1740 पर कॉल करके भी सहायता ले सकते हैं।

आप अपने बैंक में जाकर भी , जिसका अकाउंट उससे जुड़ा हो , वहां फॉर्म भरकर complain कर सकते है , बैंक आपका  complain अपने पोर्टल पर अपडेट कर देता है । आप यही procedure अन्य थर्ड पार्टी ऐप  के लिए भी उपयोग कर सकते है , सभी ऐप में कंप्लेन करने का ऑप्शन होता है । आइए अब हम ऐप से जुड़े कुछ सवाल ले लेते है ।

1. BHIM ऐप क्या है और इसे किसने बनाया है?

यह नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा विकसित एक यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) आधारित ऐप है, जिसकी मदद से तुरंत पैसे ट्रांसफर किए जा सकते हैं।

क्या BHIM ऐप इस्तेमाल करने के लिए इंटरनेट जरूरी है?

हाँ, ऐप आधारित ट्रांजैक्शन के लिए इंटरनेट चाहिए, लेकिन बिना इंटरनेट के भी *99# डायल करके यूएसएसडी (USSD) कोड के जरिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

BHIM ऐप की डेली ट्रांजैक्शन लिमिट कितनी है? 

आम तौर पर BHIM ऐप से एक दिन में अधिकतम 1 लाख रुपये तक ट्रांसफर किए जा सकते हैं और प्रति ट्रांजैक्शन की सीमा भी बैंक के नियमों के अनुसार तय होती है।

क्या BHIM ऐप का इस्तेमाल करने पर कोई चार्ज लगता है? 

नहीं, BHIM ऐप से बैंक खाते में पैसे भेजने या मंगाने के लिए एनपीसीआई की तरफ से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।

BHIM ऐप में एक साथ कितने बैंक खाते जोड़े जा सकते हैं? 

आप अपने एक ही मोबाइल नंबर से जुड़े कई बैंकों के खातों को इस ऐप में लिंक कर सकते हैं और जरूरत के अनुसार प्राइमरी अकाउंट बदल सकते हैं। आप इसमें अपना क्रेडिट कार्ड भी जोड़ सकते है ।

अगर BHIM ऐप से पैसे कट जाएं और सामने वाले को न मिलें तो क्या करें? 

ऐसी स्थिति में ट्रांजैक्शन फेल होने पर आमतौर पर पैसे 3 से 5 दिन में  (working days) के भीतर स्वतः आपके खाते में वापस आ जाते हैं।  अगर उतने दिन में पैसा नहीं आता तो आप ऐप के 'Help' या 'Transaction History' सेक्शन में जाकर शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं। या अपने बैंक में जाकर वहां भी शिकायत दर्ज करा सकते है ।

इस लेख में हमने  लगभग सभी पहलू पर जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया , अब अंत में यह जान ले कि  UPI चालू करने के लिए क्या क्या आवश्यकता है ?

  1. एक स्मार्टफोन (एंड्रॉइड या आईओएस)
  2. एक बैंक खाता जिससे आपका मोबाइल नंबर लिंक हो
  3. बैंक खाते से जुड़ा डेबिट/एटीएम कार्ड (UPI PIN सेट करने के लिए)
  4.  कोई भी अपना भीम ऐप पर UPI चालू कर सकता है ।

भारत के कुल डिजिटल ट्रांजैक्शन में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। सरकारी आंकड़ों (PIB/NPCI) के अनुसार, देश के कुल डिजिटल भुगतानों में UPI की हिस्सेदारी लगभग 85% है।

 दुनिया भर में होने वाले कुल रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन में अकेले UPI की हिस्सेदारी लगभग 49% है ।

वर्तमान में भारत में प्रतिदिन औसतन 60 से 66 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन केवल UPI के माध्यम से होते हैं।

कुल UPI वॉल्यूम का लगभग 63% हिस्सा मर्चेंट या दुकानदारों को किए जाने वाले भुगतान (Person-to-Merchant) का होता है, जो छोटे और रोजमर्रा के लेन-देन में इसकी भारी लोकप्रियता को दिखाता है।

अगस्त 2026 में UPI लेनदेन की संख्या (Volume) अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। इस महीने कुल 24.51 अरब (24.51 Billion) ट्रांजैक्शन हुए, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 22% अधिक हैं।

अगस्त 2026 में कुल 29.82 लाख करोड़ रुपये मूल्य के लेनदेन किए गए। हालांकि मई और जुलाई 2026 में यह आंकड़ा लगभग 29.9 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड के करीब पहुंच चुका है।

 पिछले एक दशक में UPI के दायरे में भारी बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2016-17 के शुरुआती दौर से लेकर अब तक ट्रांजैक्शन वैल्यू में 4,000 गुना से अधिक की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।

भारत का यह डिजिटल पेमेंट नेटवर्क अब देश के बाहर कुल 11 देशों (जैसे सिंगापुर, यूएई, फ्रांस, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और उज्बेकिस्तान आदि) में सक्रिय और स्वीकृत है। और भी देश धीरे धीरे इसे  अपनाने की तैयारी कर रहे है ।


 यह UPI ही है जिससे कि आज आपन १ रुपए भी ऑनलाइन भेज सकते है ,  सब्जी वाले से लेकर दूध वाले और बढ़ी दुकानों और यहां  तक कि फुटपाथ पर समान बेचने वाले भी UPI  का इस्तेमाल करते है  । और यह दुनिया में पहला ऐसा ऐप है । और इस पर सभी भारतीयों  को गर्व होना चाहिए ।  भीम ऐप में कभी कभी जब आप QR  CODE  इमेज गैलरी से सेलेक्ट  करते है तो २०००/- से ज्यादा नहीं भेज पाते , उस समय आप किसी और मोबाइल  में QR  code भेज कर सीधा स्कैन  करके   ट्रांजैक्शन कर सकते है ।   मैं आशा करता हु कि इस लेख से आपको BHIM ऐप से जुड़ी जानकारी प्राप्त  हुई होगी । यह लेख पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद ।

धन्यवाद ।