साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud) क्या है ?

साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud)

Cyber fraud
Cyber Fraud
साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud), जिसे आसान भाषा में ऑनलाइन धोखाधड़ी या डिजिटल ठगी कहा जाता है, साइबर क्राइम का ही एक रूप है। जब कोई व्यक्ति या गिरोह इंटरनेट, कंप्यूटर, मोबाइल या किसी डिजिटल माध्यम का उपयोग करके केवल वित्तीय लाभ (पैसा कमाने) या आर्थिक नुकसान पहुँचाने के इरादे से धोखा देता है, तो उसे साइबर फ्रॉड कहा जाता है।

आपने आज तक एक न एक बार तो अवश्य सुना होगा साइबर फ्रॉड के  विषय में , या हो सकता है आपके साथ भी कभी न कभी साइबर फ्रॉड हुआ हो , आज का हमारा विषय यही है जो बहुत तेजी से बढ़ रहा है ,2025 में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज साइबर शिकायतों/मामलों की संख्या 28.15 लाख से अधिक रही, जो कि 2024 के 22.68 लाख मामलों से लगभग 24% अधिक है  ,आप इसी से अंदाजा लगा सकते है कि यह कितना तेजी से बढ़ा है , आज के मोबाइल , इंटरनेट और UPI के युग  में इसे और बढ़ावा मिला और लोग इसके शिकार होते जा रहे है |

वर्ष 2025 में भारतीयों को साइबर धोखाधड़ी के कारण ₹22,495 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ। अच्छी खबर यह भी रही कि  बैंकों और सरकार के प्रयासों से 1930 हेल्पलाइन और बैंक  के जरिए संदिग्ध खातों को रियल-टाइम में फ्रीज करके नागरिकों के ₹11,000 करोड़ से अधिक डूबने से बचाए  जा सके , साइबर फ्रॉड होने के बाद जल्द से जल्द रिपोर्ट करना बहुत  आवश्यक है  आपका पैसा वापस लेने के लिए | इस लेख में हम यह जानने का प्रयास करेंगे कि  यह क्या होता है ? क्यों होता है और कैसे होता है ?  सबसे पहले हम  इतिहास से शुरुआत करेंगे |

साइबर फ्रॉड (ऑनलाइन धोखाधड़ी) का इतिहास तकनीक के विकास, इंटरनेट के विस्तार और वित्तीय लेनदेन के डिजिटलीकरण के साथ जुड़ा हुआ है। जैसे-जैसे इंसानों ने तकनीक को अपनाया, वैसे-वैसे अपराधियों ने भी धोखाधड़ी के नए और डिजिटल तरीके खोज निकाले। जितना तेज पैसे का लेन देन हुआ उसके साथ ही साइबर फ्रॉड के भी नए नए तरीके सामने आये |

साइबर फ्रॉड  या साइबर क्राइम के इतिहास को प्रमुख चरणों में इस प्रकार समझा जा सकता है आइए देखते है |

1. शुरुआती दौर (1970 और 1980 का दशक) – टेलीफोन और शुरुआती कंप्यूटिंग फ्रॉड

  • फ्रीकिंग (Phreaking): इंटरनेट के व्यापक प्रसार से पहले, 1970 के दशक में 'फ्रीकिंग' का दौर था। इसमें लोग टेलीकॉम सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर मुफ्त में लंबी दूरी की कॉल करते थे या सिस्टम को चकमा देते थे। ये वो दौर था जब टेलीफोन आए थे और उनपर बात करने के बहुत पैसे लगते थे , तब  फ्रीकिंग का जन्म हुआ |
  • पहला मैलवेयर और कंप्यूटर वायरस (1980 के दशक के अंत तक): शुरुआती समय में साइबर अपराध मुख्य रूप से सिस्टम को हैक करने या वायरस फैलाने तक सीमित थे। 1988 में 'मॉरिस वॉर्म' (Morris Worm) आया, जिसने इंटरनेट से जुड़े शुरुआती हजारों कंप्यूटरों को प्रभावित किया था। हालांकि यह वित्तीय धोखाधड़ी से ज्यादा तकनीकी सेंधमारी थी, लेकिन इसने डिजिटल सुरक्षा की कमजोरी को दुनिया के सामने ला दिया था। यह इतिहास का पहला वायरस था , जिसने उस समय के बहुत सारे इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटर को प्रभावित किया था |

2. इंटरनेट का प्रसार और कमर्शियल युग (1990 का दशक) – फिशिंग और ईमेल स्कैम का जन्म

  • डायल-अप इंटरनेट और फर्जी ईमेल: 1990 के दशक के मध्य में जब आम लोगों के लिए इंटरनेट और वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) की शुरुआत हुई, तो साइबर अपराधियों ने नए रास्ते तलाशे।  WWW (World Wide Web), जिसे आमतौर पर वेब (Web) भी कहा जाता है, इंटरनेट का वह हिस्सा है जहाँ वेबसाइट्स, वेब पेजों और डिजिटल कंटेंट (टेक्स्ट, फोटो, वीडियो) को एक्सेस किया जाता है। ​आसान शब्दों में: इंटरनेट अगर सड़कों का एक विशाल नेटवर्क (इन्फ्रास्ट्रक्चर) है, तो WWW उस पर चलने वाली गाड़ियाँ और गंतव्य (वेबसाइट्स) हैं। आप इसे इंटरनेट की शुरुआत कह सकते है | आप आज जो इंटरनेट इस्तेमाल करते है वह www ही है |
  • 'प्रिंस ऑफ नाइजीरिया' (419 स्कैम): इसी दौर में ईमेल के जरिए बड़े पैमाने पर ठगी की शुरुआत हुई। नाइजीरियाई स्कैम के नाम से मशहूर इन फर्जी ईमेल में लोगों को यह लालच दिया जाता था कि उन्हें करोड़ों की संपत्ति या वसीयत मिलने वाली है, बशर्ते वे पहले कुछ हजार डॉलर 'प्रोसेसिंग फीस' के रूप में भेजें। यहीं से आधुनिक फिशिंग और एडवांस फी फ्रॉड की नींव पड़ी। इसका नाम नाइजीरियाई दंड संहिता (Criminal Code) की  धारा 419 के नाम पर रखा गया है, जो धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े से जुड़े अपराधों को प्रतिबंधित करती है। 

3. ई-कॉमर्स और ऑनलाइन बैंकिंग का विस्तार (2000 का दशक) – वित्तीय धोखाधड़ी की शुरुआत

  • क्रेडिट कार्ड और बैंकिंग फ्रॉड: 2000 के दशक की शुरुआत में जब लोगों ने ऑनलाइन शॉपिंग, इंटरनेट बैंकिंग और क्रेडिट कार्ड का उपयोग करना शुरू किया, तो ठगों ने वित्तीय डेटा चुराना शुरू कर दिया। ऑनलाइन होने से  डेटा चुराना आसान होता गया |
  • मैलवेयर और ट्रोजन हॉर्स: बैंक खातों के पासवर्ड और पिन चुराने के लिए विशेष प्रकार के सॉफ्टवेयर (Keyloggers & Trojans) बनाए जाने लगे। बैंक खातों के पासवर्ड और पिन चुराने के लिए Zeus, Dridex, और RedLine Stealer जैसे बैंकिंग ट्रोजन और कीलॉगर्स का उपयोग किया जाता है।
  • भारत में शुरुआत और कानून: भारत में भी इस दशक की शुरुआत में इंटरनेट का चलन बढ़ा। साइबर अपराधों से निपटने के लिए भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act, 2000) लागू किया, ताकि डिजिटल दुनिया के अपराधों को कानूनी दायरे में लाया जा सके। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000) भारत में साइबर अपराधों को रोकने और इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स (ई-कॉमर्स) व डिजिटल लेन-देन को कानूनी मान्यता देने वाला प्रमुख कानून है। ये कानून के आने के बाद ही ऑनलाइन और डिजिटल फ्रॉड को अपराध के दायरे में लाया जा सका | इसके बारे में हम विस्तार से आगे चर्चा करेंगे | 

4. स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और डिजिटल वॉलेट का दौर (2010 का दशक) – आम आदमी तक पहुँच

  • स्मार्टफोन क्रांति: 4G इंटरनेट और स्मार्टफोन के आने से साइबर फ्रॉड सिर्फ कंप्यूटर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे हर व्यक्ति की जेब तक पहुँच गया।  स्मार्ट फोन आने के बाद ऑनलाइन और डिजिटल ट्रांजेक्शन की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी , बैंकों और  वित्तीय संस्थाओं ने धीरे धीरे मोबाइल  ऐप्स और मोबाइल बैंकिंग की तरफ रुख किया , लेकिन इसके साथ ही धोखा धड़ी  करने वाले को  नए मौके  मिलते  गए |
  • ओटीपी (OTP) और विशिंग फ्रॉड: बैंक खातों को सुरक्षित करने के लिए जब ओटीपी सिस्टम आया, तो ठगों ने फोन कॉल (विशिंग) के जरिए लोगों को झांसे में लेकर ओटीपी पूछना शुरू कर दिया। इसमें  कई तरह के फ्रॉड शामिल है जैसे कि आप से सीधे ओटीपी पूछना कि मैं बैंक से फोन कर रहा हूं , या आपका मोबाइल हैक करके सीधा ओटीपी जान लेना , या कई बार SIM क्लोनिंग के जरिए भी होता है |
  • फर्जी कस्टमर केयर स्कैम: गूगल पर फर्जी हेल्पलाइन नंबर डालकर लोगों को बैंक या वॉलेट (जैसे Paytm) के नाम पर ठगने का दौर इसी दशक में तेजी से बढ़ा। एक बात ध्यान रखे आप कभी भी टोल फ्री नंबर गूगल पर  सर्च करके प्राप्त न करे , आप बैंक के ऑफिशियल वेबसाइट से ही नंबर लेकर बात करे , फर्जी कस्टमर केयर में  सबसे पहले यही बताया जाता है कि , मै बैंक से बोल रहा हु , इसलिए सावधान रहे |
 आज के युग में कितने प्रकार से फ्रॉड हो  रहे है या किए जा सकते है , यह सही सही बताना भी कठिन है , हर रोज एक नए प्रकार का फ्रॉड सामने आता है , फिर भी हम समझने के लिए इन्हें  कई प्रकार में विभाजित कर सकते है , आइये अब एक एक करके  जानते है |

साइबर फ्रॉड कितने प्रकार के होते हैं?


भारत में साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud) के कई प्रकार होते हैं। इन्हें समझने का सबसे आसान तरीका है कि धोखेबाज किस तरीके से आपकी बैंकिंग जानकारी, OTP, UPI, पासवर्ड या पैसे चुराने की कोशिश करते हैं। ये फ्रॉड अलग अलग तरीके से किये जाते  है , इसके आधार पर हम इन्हें विभाजित कर सकते है , जो समझने के लिए आसान हो |

साइबर फ्रॉड के प्रकारों की कोई एक निश्चित आधिकारिक संख्या नहीं है। सामान्य जानकारी के लिए इन्हें लगभग 15–20 प्रमुख श्रेणियों में समझा जा सकता है।

1. UPI फ्रॉड

Google Pay, PhonePe या Paytm जैसे ऐप से भुगतान के नाम पर धोखाधड़ी करना। पैसे प्राप्त करने के लिए भी यदि कोई PIN डालने को कहे, तो सावधान रहें। UPI फ्रॉड एक डिजिटल वित्तीय अपराध है, जिसमें धोखेबाज फ़िशिंग लिंक, फर्जी QR कोड या झांसे में लेकर लोगों के बैंक खातों से अनधिकृत तरीके से पैसे उड़ा लेते हैं। आज के समय में UPI से फ्रॉड करना सबसे आम है , इसलिए किसी से पैसा लेते या देते समय सावधान रहे | आप UPI को अच्छे से समझने के के लिए मेरे द्वारा लिखा लेख UPI   को पढ़  सकते है |

2. OTP फ्रॉड

बैंक, KYC या अन्य सेवा के नाम पर OTP पूछकर खाते से पैसे निकालना या अकाउंट पर कब्जा करना। OTP फ्रॉड में जालसाज बैंक या अधिकारी बनकर कॉल, मैसेज या फर्जी ऐप के जरिए यूज़र को भ्रमित करते हैं। इसके बाद वे गोपनीय वन-टाइम पासवर्ड (OTP) हासिल करके उनके बैंक खाते से अनधिकृत लेन-देन कर लेते हैं। आज कल सभी ट्रांजेक्शन ओटीपी से ही होते है , इसलिए ओटीपी कभी भी शेयर न करे |

3. फर्जी कस्टमर केयर फ्रॉड

इंटरनेट पर नकली बैंक या कंपनी का हेल्पलाइन नंबर देकर ग्राहक से गोपनीय जानकारी लेना। फर्जी कस्टमर केयर फ्रॉड में जालसाज सर्च इंजन या सोशल मीडिया पर फर्जी हेल्पलाइन नंबर डालकर खुद को बैंक या कंपनी का अधिकारी बताते हैं। इसके बाद वे मदद करने के बहाने गोपनीय बैंकिंग जानकारी या स्क्रीन-शेयरिंग ऐप डाउनलोड करवाकर पैसे ऐंठ लेते हैं। ये आपको फोन आते है , तो कहा  जाता है कि मै बैंक अधिकारी बोल रहा हूँ आपका खाता या एटीम बंद होने वाला है , इसलिए ओटीपी बता दीजिए | हमेशा सावधान रहे कभी भी बैंक से फोन आए , तो कुछ बताने से पहले जांच ले कि आप सही आदमी से बात कर रहे है |

4. फिशिंग (Phishing) फ्रॉड

नकली ईमेल, SMS या वेबसाइट के जरिए बैंकिंग विवरण, पासवर्ड या कार्ड की जानकारी चुराना। फिशिंग फ्रॉड में जालसाज बैंक या किसी भरोसेमंद कंपनी के नाम से मिलते-जुलते नकली ईमेल, मैसेज या वेबसाइट भेजकर लोगों को झांसे में लेते हैं। इसके बाद वे पासवर्ड, पिन और बैंक विवरण जैसी गोपनीय जानकारी चुराकर उनके खाते से अवैध निकासी कर लेते हैं। इसमें आपके पास लिंक आ सकता आपके बैंक के नाम से जुड़े मिलते  जुलते वेबसाइट से की केवाईसी कीजिए , और आप उसपर क्लिक कर के अपना  पहचान और गुप्त दस्तावेज दे देते है | कभी भी गूगल में सर्च करे के बैंक वेबसाइट या ट्रांजेक्शन न करे , सही वेबसाइट बैंक से जान सकते है , या बैंक से मिले डॉक्यूमेंट में लिखा रहता है देख सकते है |

 5. ATM और कार्ड फ्रॉड

कार्ड क्लोनिंग, स्किमिंग, चोरी किए गए कार्ड विवरण या नकली ATM उपकरणों से धोखाधड़ी करना। जब आप ATM से पैसे निकलने जाते है , तब हमेशा सावधान रहे , किसी को भी अपना कार्ड न दे और न ही पिन बताए , अगर आपको ATM चलना नहीं आता तो किसी  परिचित को साथ ले जाए |  

ATM मशीन का उपयोग करते समय हमेशा यह जांच लें कि कार्ड स्लॉट या कीपैड पर कोई अतिरिक्त उपकरण (स्किमर) तो नहीं लगा है। अपना पिन दर्ज करते समय हमेशा हाथ से कीपैड को ढक कर रखें।

6. QR कोड फ्रॉड

पैसे प्राप्त करने का झांसा देकर QR कोड स्कैन करवाना या भुगतान की प्रक्रिया का दुरुपयोग करना।  इसका मुख्य कारण हमेशा जल्दबाजी होती है , हमेशा पैसा डेबिट करने के लिए पिन की आवश्यकता होती है , लेने  के लिए नहीं |

याद रखें कि पैसे प्राप्त करने (Receive) के लिए कभी भी QR कोड स्कैन करने या यूपीआई पिन (UPI PIN) दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती है। पिन केवल पैसे भेजने के समय ही दर्ज किया जाता है।

7. स्क्रीन शेयरिंग और रिमोट एक्सेस फ्रॉड

धोखेबाज के कहने पर ऐप इंस्टॉल करने या स्क्रीन शेयर करने से गोपनीय जानकारी उजागर हो सकती है। किसी भी अनजाने   लिंक या  कोई कहे कि मै बैंक से बोल रहा हु , केवाईसी करने के लिए यह लिंक पर क्लिक करके ऐप इंस्टॉल करे , तो पहले जांच पड़ताल कर ले , और कोई भी  अनजाने ऐप इंस्टॉल करने से बचे |

किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने फोन या कंप्यूटर में Anydesk, TeamViewer जैसी स्क्रीन शेयरिंग या थर्ड-पार्टी ऐप्स इंस्टॉल न करें। ऐसा करने से फ्रॉड करने वाले आपके बैंक खातों तक पूरी पहुंच बना सकते हैं।

8. ऑनलाइन निवेश फ्रॉड

शेयर बाजार, ट्रेडिंग टिप्स या निवेश पर निश्चित और असामान्य रूप से अधिक मुनाफे का लालच देना। व्हॉट्सऐप  पर कई सारे ऐसे ग्रुप होते है जिसमें आप ज्वाइन करते है टिप्स के लिए या निवेश के लिए की आपका पैसा जल्दी से डबल हो जाए | कोई भी ऐसा ग्रुप या ऑनलाइन निवेश  करने से पहले अच्छे से जानकारी प्राप्त कर ले  और फिर सही फैसला करे |

सोशल मीडिया या टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए मिलने वाले अत्यधिक मुनाफे के झूठे वादों से सावधान रहें। हमेशा सेबी (SEBI) पंजीकृत वित्तीय सलाहकारों और अधिकृत निवेश प्लेटफार्मों का ही उपयोग करें। 

9.लोन फ्रॉड

नकली लोन ऐप या एजेंट द्वारा लोन स्वीकृति के नाम पर अग्रिम शुल्क अथवा व्यक्तिगत जानकारी लेना। बहुत सारे  ऐसे ऐप होते है जो फ्रॉड होते  है , और आपसे प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे ले लिए जाते है , और कोई लोन नहीं दिया जाता |

किसी भी ऋण (Loan) को मंजूर करने से पहले प्रोसेसिंग फीस या एडवांस पैसे मांगने वाले ऐप्स और एजेंटों से दूर रहें। लोन लेने के लिए हमेशा आरबीआई (RBI) द्वारा मान्यता प्राप्त बैंकों या एनबीएफसी (NBFC) का ही चयन करें।

10. KYC अपडेट फ्रॉड

बैंक खाता बंद होने या KYC समाप्त होने का डर दिखाकर नकली लिंक पर क्लिक करवाना। यह सबसे आम तरीका है फ्रॉड करने का , आपके पास फोन आता है , जल्दी केवाईसी कीजिए नहीं तो खाता बंद हो जाएगा , और आपके पास लिंक भेजा जाता है केवाईसी अपडेट करने के लिए , और आप अपनी  अकाउंट संबंधी जानकारी उसमें भर देते है | 

बैंक कभी भी फोन पर या एसएमएस के जरिए भेजे गए लिंक से KYC अपडेट करने के लिए नहीं कहते। ऐसी किसी भी लिंक पर क्लिक करने से बचें और हमेशा बैंक की आधिकारिक शाखा या ऐप का उपयोग करें।  

11.नौकरी और रोजगार फ्रॉड

घर बैठे काम, ऑनलाइन नौकरी या नौकरी दिलाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस लेना। ऑनलाइन जॉब पोर्टल के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस ले ली जाती है आपसे , कभी कभी कई बार , कई भी ऑनलाइन अप्लाई करने से पहले जानकारी प्राप्त करके सोच समझ कर अप्लाई करे |

 किसी भी प्रतिष्ठित और वैध कंपनी में नौकरी पाने के लिए कभी भी इंटरव्यू या रजिस्ट्रेशन के नाम पर पैसे नहीं देने पड़ते हैं। जॉब ऑफर मिलने से पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और ईमेल डोमेन की अच्छी तरह जांच कर लें।  

12.डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड

पुलिस, CBI या अन्य सरकारी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाना और पैसे मांगना। असली पुलिस डिजिटल अरेस्ट के नाम पर पैसे जमा कराने का आदेश नहीं देती। यह ऐसा फ्रॉड है जिसमें बहुत सारे लोगों ने पैसे गंवाए है , अक्सर बुजुर्ग लोगों को  निशाना बनाया जाता है | ध्यान रखे डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ नहीं होता |

कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं होती है; पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर पूछताछ या पैसों का लेन-देन नहीं करती है। ऐसी कोई कॉल आने पर तुरंत घबराएं नहीं, कॉल काट दें और राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर '1930' पर शिकायत दर्ज कराएं।    

13.SIM स्वैप फ्रॉड

धोखे से आपके मोबाइल नंबर का दूसरा SIM सक्रिय करवाकर OTP और बैंकिंग खातों तक पहुंच बनाने की कोशिश करना।आपके SIM का क्लोन बनाकर आपके SMS और ओटीपी प्राप्त कर के आपके खाते से पैसे चोरी करना |

 यदि अचानक आपके मोबाइल का नेटवर्क लंबे समय के लिए गायब हो जाए या सिग्नल पूरी तरह बंद हो जाएं, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। अपने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर (जैसे JIO, Airtel आदि) से संपर्क कर पुष्टि करें कि आपके नंबर पर कोई नई सिम जारी तो नहीं की गई है।  

14. सोशल मीडिया फ्रॉड

Facebook, Instagram या WhatsApp पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर पैसे मांगना या लोगों को ठगना। आपको आपके परिचित के   सोशल मीडिया अकाउंट जैसे कि फेसबुक या व्हॉट्सऐप से मैसेज आता है मुझे  इमरजेंसी में पैसे  की जरूरत है , और आप  जल्दी से पैसा भेज देते है |ऐसा कुछ भी होने पर पहले उस व्यक्ति को फोन करके बात करे फिर कोई  निर्णय ले |

सोशल मीडिया पर किसी परिचित या दोस्त द्वारा अचानक पैसों की मांग किए जाने पर सीधे फोन कॉल या वीडियो कॉल करके सच्चाई की पुष्टि जरूर करें। अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से बचें और अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स को मजबूत रखें।  

15.ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड

नकली वेबसाइट या विक्रेता द्वारा पैसे लेकर सामान नहीं भेजना अथवा गलत सामान भेजना। किसी भी नई वेबसाइट से कभी भी सिर्फ सस्ता  देखकर सामान ऑर्डर न करे , पहले उसकी  जांच पड़ताल कर ले , हमेशा जाने माने पोर्टल से ही ऑर्डर करे |

हमेशा जानी-मानी और आधिकारिक ई-कॉमर्स वेबसाइटों या ऐप्स से ही खरीदारी करें, और अत्यधिक भारी छूट देने वाली अज्ञात वेबसाइटों से बचें। भुगतान हमेशा सुरक्षित माध्यमों (जैसे क्रेडिट कार्ड या कैश ऑन डिलीवरी) से करें ताकि फ्रॉड होने पर रिकवरी आसान हो सके।   

16. पार्सल और कूरियर फ्रॉड

नकली पार्सल, कस्टम या डिलीवरी समस्या का बहाना बनाकर भुगतान या निजी जानकारी मांगना। अगर आपने कोई पार्सल नहीं मंगाया और फिर भी कोई पार्सल देने के लिए फोन कर रहा है , तो सावधान हो जाए यह फ्रॉड हो सकता है |

 यदि आपने कोई पार्सल नहीं मंगाया है और किसी कूरियर कंपनी से कस्टम ड्यूटी या एड्रेस अपडेट करने का मैसेज आए, तो उस पर कभी विश्वास न करें। हमेशा संबंधित कूरियर कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ट्रैकिंग नंबर से असली स्थिति की जांच करें।   

17. रोमांस फ्रॉड

ऑनलाइन दोस्ती या प्रेम संबंध का विश्वास जीतकर आर्थिक मदद के नाम पर पैसे मांगना। ऑनलाइन दोस्ती के चक्कर में आप धोखाधड़ी का शिकार हो सकते है , इसलिए  सोच समझ कर कदम उठाए |

सोशल मीडिया या डेटिंग ऐप्स पर मिलने वाले किसी भी ऐसे व्यक्ति को कभी भी पैसे ट्रांसफर न करें जिसे आपने वास्तविक जीवन में कभी न देखा हो। ठग अक्सर भावनात्मक रूप से जोड़कर और बड़ी मजबूरियां बताकर पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं।    

18. मालवेयर और वायरस फ्रॉड

हानिकारक ऐप या फाइल के जरिए डिवाइस और डेटा तक अनधिकृत पहुंच प्राप्त करना। कुछ भी अनजान लिंक पर क्लिक करने  या कोई ऐप सीधा डाउनलोड करने से बचे , हो सकता है वह वायरस या मैलवेयर सॉफ्टवेयर हो |

 अपने स्मार्टफोन या लैपटॉप में हमेशा एक भरोसेमंद एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का उपयोग करें और ऐप्स केवल आधिकारिक स्टोर (जैसे Google Play Store या Apple App Store) से ही डाउनलोड करें। किसी भी अनजान सोर्स से आई एपीके (APK) फाइल या संदिग्ध लिंक को इंस्टॉल या ओपन न करें।   

19. AI वॉइस और डीपफेक फ्रॉड

AI से किसी परिचित की नकली आवाज या वीडियो बनाकर आपातकाल का बहाना करके पैसे मांगना।  AI का इस्तेमाल जैसे जैसे बढ़ रहा है , इससे जुड़े फ्रॉड भी बढ़ रहे है , यह आपकी आवाज की नकल कर सकता है और आपकी शक्ल के वीडियो भी बना सकता है , जिसके  जरिए फ्रॉड होता है |

यदि परिवार के किसी सदस्य या दोस्त की आवाज में अचानक किसी संकट (जैसे एक्सीडेंट या पुलिस केस) के लिए पैसे मांगे जाएं, तो तुरंत उनके सामान्य नंबर पर अलग से कॉल करके स्थिति की सच्चाई का पता लगाएं। बातचीत के दौरान ऐसे कोडवर्ड या निजी सवाल पूछें जिनका जवाब केवल वही असली व्यक्ति दे सके।  

20. चैरिटी और दान फ्रॉड

नकली संस्था, बीमारी, दुर्घटना या आपदा के नाम पर ऑनलाइन चंदा इकट्ठा करना। आपके पास अचानक से फोन आता है हमारे पास एक केस आया है उसके लिए दान चाहिए , और इस तरीके से बात की जाती है कि आपको यकीन हो जाए | ऐसा कुछ हो तो पहले  जांच ले फिर निर्णय ले|

किसी भी एनजीओ (NGO), ट्रस्ट या फंडरेज़र को दान देने से पहले उसकी आधिकारिक मान्यता, रजिस्ट्रेशन और प्रमाणिकता की अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर लें। हमेशा सत्यापित सरकारी राहत कोष या जानी-मानि प्रतिष्ठित संस्थाओं के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ही सहयोग करें।

हमने यहां पर सभी प्रकार के साइबर फ्रॉड के विषय को थोड़ा थोड़ा जानने का प्रयास किया , आगे हम एक एक करके विस्तार से चर्चा करेंगे , क्योंकि यह बहुत बड़ा विषय है , आइए अब आगे  बढ़ते है |

साइबर फ्रॉड कैसे काम करता है? (How It Works)

साइबर ठग लोगों के साथ धोखाधड़ी करने के लिए मुख्य रूप से तीन तरीकों का इस्तेमाल करते हैं आइए एक एक करके समझते है :-

  • लालच देना: जैसे—बंपर लॉटरी लगना, घर बैठे बिना अनुभव के लाखों कमाने का झांसा देना, या बहुत सस्ते दामों में सामान बेचना। यह सबसे मुख्य तरीका है , लालच में फसते ही  आपकी बुद्धि काम करना बंद कर देती है , अगर लालच से कम नहीं बनता तो दूसरा तरीका है |
  • डर पैदा करना: जैसे—पुलिस या सीबीआई अधिकारी बनकर यह कहना कि आपके नाम का पार्सल ड्रग्स में पकड़ा गया है या आपका बैंक खाता सीज होने वाला है। आप डर जाते है और तुरंत पैसे दे देते है , आपको अलग अलग प्रकार से दरया जाता है |
  • तकनीकी भ्रम पैदा करना: बैंक, बिजली विभाग या किसी मशहूर कंपनी के नाम से फर्जी मैसेज और लिंक भेजना ताकि लोग घबराहट या उत्सुकता में अपनी निजी जानकारी साझा कर दें। एक पढ़े लिखे आदमी को फोन आता है कि आज बिजली का बिल इस लिंक को क्लिक करके भर दीजिए नहीं तो आपका बिजली आज कट दी जाएगी , यह सुनते ही आदमी सब भूल जाता है और पैसा दे देता है | ऐसे बहुत लोग फंस जाते है |

साइबर फ्रॉड से बचने के उपाय (Precautions & Safety)

 नीचे दिए गए निर्देश हमेशा ध्यान रखे ताकि आप साइबर फ्रॉड से बच सके , हम ऊपर भी इनकी चर्चा कर चुके है , आइए देखते है :-
  • ओटीपी और पिन गुप्त रखें: अपना UPI PIN, पासवर्ड, OTP या बैंक अकाउंट नंबर किसी के साथ भी शेयर न करें। बैंक अधिकारी कभी भी फोन पर ओटीपी नहीं मांगते। यह सब गोपनीय जानकारी है इसे किसी भी अवस्था में साझा न करे |
  • दबाव में न आएं: अगर कोई फोन पर खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर डराए, तो घबराएं नहीं। तुरंत फोन काट दें। असली एजेंसियां कभी वीडियो कॉल पर पूछताछ या पैसों की मांग नहीं करतीं। सबसे पहले फोन काट दे और उस नंबर को ब्लॉक कर दे , अगर जरूरी है तो किसी से बात करे और उसे बताए आपका डर चला जाएगा |
  • अज्ञात लिंक्स पर क्लिक न करें: किसी भी अनजान नंबर से आए लुभावने ऑफर्स या लॉटरी के संदेशों वाले लिंक पर क्लिक न करें। कभी भी कैश बैक ऑफर , या सस्ता सामान के लोभ में कोई ऐप या किसी लिंक पर क्लिक न करे |
  • विश्वसनीय ऐप्स का ही उपयोग करें: केवल Google Play Store या Apple App Store से ही वेरिफाइड ऐप्स डाउनलोड करें।  और कही से ऐप इंस्टॉल करने से पहले जांच ले कि सही  ऐप हो फ्रॉड तो नहीं है |
  • सोशल मीडिया पर सावधानी: अपनी निजी जानकारी, परिवार की तस्वीरें और फोन नंबर सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से साझा करने से बचें। आप इतना सोशल न हो कि जो जानकारी पब्लिक नहीं करनी चाहिए वो पब्लिक हो जाए , कुछ भी ऑनलाइन पोस्ट करने से पहले अवश्य एक बार  सोच ले |

साइबर फ्रॉड होने पर क्या करें? (Action Plan if Scammed)

अगर सभी सावधानियों के बावजूद आपके साथ  साइबर  फ्रॉड  हो जाए तो क्या करे | सबसे पहले  ऑनलाइन धोखाधड़ी    ( fraud ) होने पर घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत सही कदम उठाएं। साइबर अपराध में शुरुआती कुछ घंटे "गोल्डन आवर्स (Golden Hours)" कहे जाते हैं,  मतलब आप जितना जल्दी  अपने बैंक को सूचित कर पाते है उतना जल्दी , बैंक आगे की प्रक्रिया पूरी करके पैसा जाने से  रोक सकता है  , इस लिए जिनमें की गई त्वरित कार्रवाई से पैसे वापस मिलने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। इसलिए यह सबसे महत्वपूर्ण कदम है | आप नीचे दिए गए 

यदि आपके साथ साइबर फ्रॉड हुआ है, तो घबराएं नहीं और बिना देरी किए निम्नलिखित कदम उठाएं:

  1. 1930 पर कॉल करें: साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराएं। जल्द शिकायत करने से धोखाधड़ी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।

  2. ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें: भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर जाकर Report Cyber Crime विकल्प के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करें। प्राप्त Acknowledgement Number सुरक्षित रखें।

  3. बैंक और भुगतान ऐप को सूचित करें: तुरंत अपने बैंक के कस्टमर केयर या शाखा में शिकायत दर्ज कराएं। जरूरत के अनुसार डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या UPI सुविधा ब्लॉक करवाएं। यदि फ्रॉड Google Pay, PhonePe या Paytm से हुआ है, तो संबंधित ऐप में भी शिकायत करें।

  4. सभी सबूत सुरक्षित रखें: फ्रॉड ट्रांजैक्शन की रसीद, Transaction ID/UTR नंबर, बैंक स्टेटमेंट, SMS, WhatsApp चैट, ईमेल, कॉल नंबर और फर्जी वेबसाइट के लिंक सुरक्षित रखें। सभी शिकायतों के Reference Number भी संभालकर रखें।

  5. पुलिस में शिकायत करें: अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम सेल में लिखित शिकायत दें। बैंक स्टेटमेंट, पहचान पत्र और फ्रॉड से संबंधित सभी सबूत जमा करें। मामले के अनुसार FIR दर्ज करवाएं और उसकी कॉपी प्राप्त करें।

महत्वपूर्ण: बैंक, 1930 और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करने के लिए FIR की प्रतीक्षा न करें। सभी शिकायतें जल्द से जल्द दर्ज कराएं। पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं होती, लेकिन समय पर कार्रवाई से उसे रोकने और वापस पाने की संभावना बेहतर हो सकती है।

महत्वपूर्ण सावधानियां (Precautionary Tips for Future)

  • OTP या पिन शेयर न करें: बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या कोई भी अन्य व्यक्ति कभी भी ओटीपी (OTP), यूपीआई पिन (UPI PIN) या पासवर्ड नहीं मांगता। यह बात  हमेशा ध्यान रखे और  ये नियम दृढ़ता के साथ पालन करे |
  • अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें: अनजान नंबरों से आए लॉटरी, कैशबैक, बिजली बिल अपडेट या नौकरी के ऑफर्स वाले लिंक्स पर क्लिक न करें। किसी भी कारण से किसी भी अज्ञात लिंक पर  क्लिक न करे | 
  • ऐप्प्स डाउनलोड करने से बचें: AnyDesk, TeamViewer या Quick Support जैसे रिमोट डेस्कटॉप ऐप्स किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने फोन या कंप्यूटर में इंस्टॉल न करें। आपका का सारा डाटा चोरी हो सकता है और आप फ्रॉड के  शिकार हो सकते है |
  • ऐसी कोई घटना होने पर  भारत सरकार के  वेबसाइट और हेल्प लाइन नंबर के साथ साथ बैंक को अवश्य सूचित करे |

याद रखें: साइबर धोखाधड़ी में समय सबसे महत्वपूर्ण है। जितनी जल्दी आप 1930 पर कॉल करेंगे और पोर्टल पर शिकायत करेंगे, आपके पैसे वापस मिलने के अवसर उतने ही अधिक होंगे।

इस लेख में हमने साइबर फ्रॉड से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करने का प्रयास किया हमने  जो साइबर फ्रॉड के प्रकार देखे हम आगे के लेखों एक एक पर विस्तार से चर्चा करेंगे , मै आशा करता हूँ कि अगर अब आपके साथ कभी  साइबर फ्रॉड हो जाए तो इस लेख से आपको कुछ मदद मिलेगी | अब आइए इससे जुड़े कुछ  महत्वपूर्ण सवाल देख लेते है |

 1. साइबर फ्रॉड होने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?

उत्तर: यदि आपके साथ ऑनलाइन बैंकिंग, UPI या किसी अन्य माध्यम से साइबर फ्रॉड हुआ है, तो तुरंत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर कॉल करें। इसके अलावा भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।

वेबसाइट:  साइबर पोर्टल वेबसाइट   के लिए यहां क्लिक करे 

2. क्या साइबर फ्रॉड होने पर बैंक से पैसा वापस मिल सकता है?

उत्तर: हाँ, कई  मामलों में बैंक से पैसा वापस मिलने की संभावना होती है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण कदम है जल्दी से जल्दी अपने बैंक और पोर्टल पर सूचित करना , तो आपके पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है | इसके लिए तुरंत अपने बैंक को सूचना दें, ट्रांजैक्शन की शिकायत दर्ज करें और संबंधित बैंकिंग रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। पैसा वापस मिलना मामले की परिस्थितियों और जाँच पर निर्भर करता है।

3. क्या UPI PIN बताने से बैंक खाते से पैसे निकल सकते हैं?

उत्तर: हाँ, यदि कोई व्यक्ति आपका UPI PIN जान लेता है और उसके पास आवश्यक अन्य जानकारी या आपके डिवाइस का नियंत्रण भी है, तो आपके खाते से अनधिकृत लेनदेन का जोखिम हो सकता है। अपना UPI PIN, OTP और पासवर्ड किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए।

 4. क्या केवल OTP बताने से साइबर फ्रॉड हो सकता है?

उत्तर: हाँ, OTP साझा करने से धोखेबाज आपके बैंकिंग, कार्ड या अन्य ऑनलाइन अकाउंट में अनधिकृत गतिविधि कर सकते हैं। हालांकि इसका प्रभाव OTP किस सेवा के लिए आया है, इस पर निर्भर करता है। बैंक या कोई भी वास्तविक सरकारी अधिकारी आपसे OTP नहीं माँगता।

5. साइबर फ्रॉड की शिकायत कहाँ और कैसे करें?

उत्तर: भारत में साइबर फ्रॉड की शिकायत निम्न माध्यमों से की जा सकती है:

हेल्पलाइन नंबर: 1930 पर कॉल करें।

ऑनलाइन पोर्टल:  साइबर पोर्टल वेबसाइट  यहां क्लिक करे  पर शिकायत दर्ज करें।

बैंक: अपने बैंक के कस्टमर केयर या होम ब्रांच में शिकायत करें।

यह लेख पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद |

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