MICR (मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकग्निशन)
(Magnetic Ink Character Recognition)
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| MICR code |
MICR code आपने कभी न कभी तो ये शब्द सुना ही होगा यह बैंकिंग क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से चेक (Cheques) की प्रोसेसिंग और क्लीयरेंस को तेज तथा सुरक्षित बनाने के लिए किया जाता है।
सरल भाषा में इसे चुंबकीय स्याही से अक्षर पहचानने की तकनीक कहा जा सकता है। यह 9 अंकों का एक कोड होता है , जो आपके चेक नंबर के पास होता है , यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें बैंक चेक के नीचे विशेष प्रकार की magnetic ink से लिखे गए शब्द को मशीन द्वारा पढ़ा जाता था। अब तक हमने पिछले लेखों में बैंक में इस्तेमाल होने वाले कई ताकिनकों की चर्चा की है जैसे कि RTGS, NEFT, IFSC , UPI आदि अब हम माइकर कोड के विषय में जानने का प्रयास करेंगे, आइए सबसे पहले MICR कोड कैसा होता है देख लेते है ।
मान लीजिए किसी बैंक शाखा का MICR Code है:
400002123 ( 9 डिजिट होते है )
क्या आप जानते है ?
MICR की जरूरत क्यों पड़ी?
पुराने समय में चेकों की क्लियरिंग काफी हद तक मैनुअल प्रक्रिया पर निर्भर थी। पुराने समय में जो लोग चेक का इस्तेमाल करते थे , उन्हें अच्छे से पता होगा , जब किसी व्यक्ति का चेक दूसरे बैंक में जमा होता था, तो:
चेक बैंक में जमा होता था।
चेक की जानकारी पढ़ी जाती थी।
संबंधित बैंक/शाखा की पहचान करनी पड़ती थी।
चेकों को संबंधित बैंक तक भेजा जाता था।
भुगतान और क्लियरिंग की प्रक्रिया पूरी होती थी। फिर पैसा आपको चेक क्लियरिंग के बाद प्राप्त होता था । इसमें बहुत समय लगता था , 10- 15 दिन से ज्यादा लग जाते थे । इसे आसान और तेज बनाने की आवश्यकता थी , भारत के बाहर के देश में माइकर कोड कब और कैसे आया और फिर भारत में कैसे आया , सबसे पहले हम इसका इतिहास देख लेते है ।
एमआईसीआर कोड का इतिहास दुनिया में
1950 के दशक से पहले दुनिया भर के बैंकों में चेक की जाँच और लेन-देन हाथ से किया जाता था, जिसमें बहुत समय लगता था और गलतियों की संभावना भी अधिक होती थी।
इस समस्या को हल करने के लिए अमेरिकन बैंकर्स एसोसिएशन (ABA) ने 1952 में एक समिति का गठन किया।
वर्ष 1955 में अमेरिका के बैंक ऑफ अमेरिका और स्टैनफोर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट ने मिलकर पहली बार एमआईसीआर तकनीक और विशेष चुंबकीय स्याही का प्रयोग शुरू किया। 1960 के दशक तक यह तकनीक पूरी दुनिया के बैंकिंग तंत्र में अपना ली गई।
भारत में कब से आया ?
भारत में बैंकिंग व्यवस्था को आधुनिक और तेज बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 1980 के दशक में एमआईसीआर प्रणाली की शुरुआत की।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़े शहरों में MICR-based चेक प्रोसेसिंग केंद्र स्थापित किए।
1986 में मुंबई में स्थापित किया गया ।
1987 में चेन्नई में स्थापित किया गया ।
1987 में नई दिल्ली में स्थापित किया गया ।
1989 में कोलकाता में स्थापित किया गया ।
इसके आने से भारत के क्लीयरिंग हाउसों में चेक का निपटान बहुत आसान हो गया, जिससे चेक क्लियर होने में लगने वाला समय काफी कम हो गया।
मुंबई में 1986 में MICR प्रोसेसिंग सेंटर की स्थापना भारत में इस व्यवस्था की शुरुआत का एक महत्वपूर्ण चरण था।
इसके बाद अन्य महानगरों में भी MICR आधारित चेक क्लियरिंग व्यवस्था विकसित की गई।
आज के दिन में CTS तकनीक का इस्तेमाल चेक क्लियरिंग के लिए होता है , लेकिन उसमें भी MICR कोड का इस्तेमाल होता है ।
आइए अब हम विस्तार से माइकर कोड की बारे में जानने का प्रयास करते है ।
एमआईसीआर कोड की मुख्य विशेषताएँ और बनावट
MICR Code बैंक और बैंक शाखा की पहचान करने वाला एक 9 अंकों का कोड है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से चेकों की इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेसिंग और क्लियरिंग में किया जाता है।
सरल भाषा में इसे। “चुंबकीय स्याही से अक्षर पहचान” कहा जा सकता है।
9 अंकों का कोड: एमआईसीआर कोड कुल 9 अंकों (Digits) का होता है, जो तीन भागों में बंटा होता है:
पहले 3 अंक (शहर कोड - City Code): उस शहर को दर्शाते हैं जहाँ बैंक की शाखा स्थित है।
बीच के 3 अंक (बैंक कोड - Bank Code): उस विशेष बैंक की पहचान कराते हैं।
आखिरी 3 अंक (शाखा कोड - Branch Code): बैंक की उस खास शाखा (Branch) का कोड होते हैं।
चुंबकीय स्याही की विशेषता
इसमें आयरन ऑक्साइड से बनी विशेष चुंबकीय स्याही का उपयोग किया जाता है। यदि चेक पर कोई मुहर, हस्ताक्षर या हल्की गंदगी भी लग जाए, तब भी एमआईसीआर रीडर मशीन इसे आसानी से पढ़ लेती है।
इस तकनीक के कारण चेक में धोखाधड़ी या नकल करना बहुत कठिन हो जाता है, जिससे बैंकिंग लेनदेन सुरक्षित बनता है।
चेक में आप देख सकते है कि सबसे पहले नीचे चेक नंबर होता है , वो हमेशा unique होता है , उसके बाद MICR कोड होता है
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| sample cheque |
एक असली MICR (Magnetic Ink Character Recognition) कोड का उदाहरण लेते हैं और इसे विस्तार से समझते हैं।
MICR कोड का उदाहरण: 400240002 (यह भारतीय स्टेट बैंक, मुंबई की एक शाखा का फॉर्मेट है)
MICR कोड कुल 9 अंकों (digits) का होता है जो कि किसी भी चेक के सबसे नीचे मुद्रित होता है। इसे आसानी से समझने के लिए 3 भागों में बांटा गया है:
MICR कोड की संरचना (9 अंकों का विवरण)
शहर का कोड (पहले 3 अंक - 400):
यह अंक उस शहर को दर्शाता है जहाँ बैंक की शाखा स्थित है।
उदाहरण: 400 मुंबई शहर के लिए उपयोग किया जाता है (यह पिन कोड की शुरुआत जैसा होता है)।
बैंक का कोड (अगले 3 अंक - 240):
यह कोड विशिष्ट बैंक की पहचान करता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हर बैंक को एक यूनिक कोड देता है।
उदाहरण: 240 भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कुछ क्षेत्रों/जोन के लिए होता है।
शाखा का कोड (आखिरी 3 अंक - 002):
यह उस बैंक की सटीक शाखा (branch) को दर्शाता है जहाँ आपका खाता है।
उदाहरण: 002 उस शहर की उस विशिष्ट बैंक शाखा का कोड है। उस ब्रांच का कोड है ।
बैंक कोड उस बैंक के लिए हमेशा एक ही रहता है । ब्रांच कोड सभी ब्रांच का अलग अलग होता है ।
आइए अब हम कुछ ब्रांच और बैंको के कोड देख लेते है , जिससे आप और अच्छे से समझ सके ।
यहाँ भारत के 5 अलग-अलग बैंकों और शहरों के मूल MICR कोड और उनका विवरण दिया गया है:
400002010 (भारतीय स्टेट बैंक, मुंबई मेन ब्रांच): यह कोड मुंबई (400) में स्थित एसबीआई (002) की मुख्य शाखा (010) के भौतिक चेक की स्वचालित प्रोसेसिंग के लिए उपयोग होता है।
110240001 (पंजाब नेशनल बैंक, नई दिल्ली मेन ब्रांच): यह कोड नई दिल्ली (110) के पीएनबी (240) की मुख्य शाखा (001) के चेक क्लीयरेंस और पहचान को सुनिश्चित करता है।
400240002 (एचडीएफसी बैंक, मुंबई शाखा): यह मुंबई (400) क्षेत्र के एचडीएफसी बैंक (240) की विशिष्ट शाखा (002) के चेक शोधन (clearing) के लिए प्रयुक्त होता है।
600019002 (इंडियन बैंक, चेन्नई मेन ब्रांच): यह कोड चेन्नई शहर (600) के इंडियन बैंक (019) की मुख्य शाखा (002) के चेकों को मशीन द्वारा पढ़ने और प्रोसेस करने में मदद करता है।
700028002 (यूको बैंक, कोलकाता मेन ब्रांच): यह कोलकाता (700) क्षेत्र के यूको बैंक (028) की शाखा (002) से संबंधित चेक की तेज और त्रुटि-मुक्त क्लीयरेंस के लिए उपयोग किया जाता. है।
आइए अब कुछ सवाल ले लेते है ,माइकर कोड के ऊपर जो अक्सर पूछे जाते है ।
MICR तकनीक कैसे काम करती है?
MICR में चेक के नीचे विशेष प्रकार की चुंबकीय स्याही से कुछ महत्वपूर्ण जानकारी छापी जाती है।
इसे चेक की MICR line कहा जाता है।
मशीन इस विशेष प्रकार के शब्दों को पढ़ सकती है।
इससे से बैंक को चेक से संबंधित जानकारी को तेजी से पहचानने और प्रोसेसिंग करने में सहायता मिलती है। आजकल CTS का इस्तेमाल क्लियरिंग करने के लिए होता है । जिसमें सभी डिटेल्स मशीन द्वारा स्कैन किए जाते है , जैसे कि अमाउंट , चेक नंबर , नाम , माइकर कोड आदि और एक दिन में क्लियरिंग हो जाती है ।
चेक पर MICR Code कहाँ होता है?
हम देख चुके है चेक के नीचे सबसे पहले चेक नंबर होता है , उसके बाद माइकर कोड होता है , और फिर ट्रांजैक्शन कोड और टाइप कोड ।
MICR और IFSC में अंतर क्या है ?
यह बहुत महत्वपूर्ण सवाल है क्योंकि दोनों codes बैंक शाखा की पहचान करते हैं, लेकिन उनका उपयोग अलग-अलग है।
माइकर कोड - 9 digit का होता है । इसका उपयोग सिर्फ क्लियरिंग के लिए होता है ।
IFSC code - 11 digit का होता है । सभी प्रकार के ट्रांजैक्शंस के लिए होता है , ऑनलाइन या ऑफलाइन एक बैंक से दूसरे बैंक को भेजने के लिए । इससे जुड़ा लेख IFSC अवश्य पढ़ ले आप अच्छे से समझ सकेंगे ।
MICR Code का इस्तेमाल कहाँ कहा होता है?
बैंक मशीनों के माध्यम से चेक की जानकारी को पढ़ और प्रोसेस (प्रसंस्कृत) कर सकते हैं।
MICR कोड संबंधित बैंक शाखा की पहचान करने में मदद करता है।
MICR ने बड़ी संख्या में चेकों की स्वचालित (automated) प्रोसेसिंग को संभव बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
MICR में Magnetic Ink क्यों इस्तेमाल होती है?
MICR में ऐसे विशेष वर्णों (characters) और चुंबकीय स्याही (magnetic ink) का उपयोग किया जाता है, जिन्हें मशीनें पूरी विश्वसनीयता के साथ पढ़ सकें।
इसका एक मुख्य लाभ यह था कि सामान्य मुद्रण (printing) की तुलना में मशीन द्वारा पढ़े जाने योग्य (machine-readable) जानकारी को चेक प्रोसेसिंग के लिए अधिक व्यवस्थित ढंग से उपयोग किया जा सके ।
यही कारण है कि इसका नाम पड़ा:
Magnetic + Ink + Character + Recognition
क्या MICR Code खाते की पहचान करता है?
नहीं।
यह बहुत महत्वपूर्ण है।
MICR Code मुख्य रूप से बैंक और ब्रांच की पहचान करता है।
यह किसी व्यक्ति के व्यतिगत बैंक अकाउंट नंबर का विकल्प नहीं है।
MICR Code कैसे पता करें?
आप अपना MICR Code कई जगह से पता कर सकते हैं:
Bank cheque book → बैंक चेकबुक (या बैंक चेक पुस्तिका) हम पहले ही जान चुके है कि चेक के नीचे माइकर कोड होता है , वहा से आप देख सकते है ।
Bank passbook → बैंक पासबुक (या बैंक पास पुस्तिका) , बैंक के पासबुक पर भी माइकर कोड प्रिंट होता है , बस ध्यान रखे कि आपकी ब्रांच नहीं बदली गई हो , नहीं तो वह भी बदल जाता है ।
* Bank की official website → बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर देख सकते है ।
* Bank branch → बैंक शाखा में जाकर आप संबंधित अधिकारी से पूछ सकते है ।
* बैंकिंग customer service → बैंकिंग ग्राहक सेवा पर फोन कर के भी पता किया जा सकता है ।
* RBI/बैंकिंग संबंधित आधिकारिक जानकारी → आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) / बैंकिंग से संबंधित आधिकारिक जा रबी की वेबसाइट से भी पता कर सकते है । मैं यह लिंक दे रहा हूँ आप यह जाकर देख सकते है RBI LINK।
आप माइकर कोड कही से भी प्राप्त करे एक बार अवश्य चेक कर ले।
अगर MICR Code गलत हो तो क्या होगा?
यदि चेक प्रोसेसिंग के दौरान MICR की जानकारी गलत या अस्पष्ट हो, तो चेक की प्रोसेसिंग प्रभावित हो सकती है।
ऐसी स्थिति में:
चेक प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है।
चेक को मैनुअल (हस्तचालित) प्रोसेसिंग की आवश्यकता पड़ सकती है।
कुछ परिस्थितियों में चेक रिटर्न (वापस) भी हो सकता है।
इसलिए चेक पर MICR से संबंधित जानकारी को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए।
आपको परेशान होने की जरूरत नहीं , बैंक आपके चेक की डिटेल्स सही कर लेता है और आपका चेक क्लियर हो जाता है , हा यदि आप कही और दे रहे है तो ध्यान रखे ।
क्या MICR आज भी महत्वपूर्ण है?
हाँ, लेकिन इसका मुख्य महत्व cheque-based banking में है।
भारत में electronic payments जैसे:
NEFT
RTGS
IMPS
UPI
के बढ़ने से डिजिटल ट्रांजैक्शंस का महत्व बहुत बढ़ गया है।
फिर भी चेक क्लियरिंग में MICR तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण रही है और चेक क्लियरिंग संरचना का यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन चेक का इस्तेमाल सभी मैनुअल ट्रांजैक्शन में होता है , इसलिए यह महत्वपूर्ण है ।
MICR, IFSC और SWIFT में क्या अंतर है ?
MICR Cheque clearing → MICR चेक क्लीयरेंस (चेक शोधन)
IFSC भारत में electronic bank transfer → भारत में IFSC द्वारा इलेक्ट्रॉनिक बैंक ट्रांसफर (इलेक्ट्रॉनिक धन हस्तांतरण) और सभी तरह के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए होता है।
SWIFT/BIC International bank transactions → स्विफ्ट/बीआईसी (SWIFT/BIC) द्वारा अंतरराष्ट्रीय बैंक लेनदेन (इंटरनेशनल बैंक ट्रांजेक्शन) , यह तब इस्तेमाल होता है जब आपको पैसा विदेश से मांगना हो , तब आपसे आपके बैंक का स्विफ्ट कोड मांगा जाता है ।
उदाहरण के लिए:
चेक (Cheque) → MICR
भारत में ऑनलाइन बैंक ट्रांसफर (Online bank transfer) → IFSC
अंतरराष्ट्रीय ट्रांसफर (International transfer) → SW IFT/BIC
एक लाइन में MICR क्या है ?
आपके द्वारा दिए गए वाक्य को पूर्ण रूप से शुद्ध और स्पष्ट हिंदी में इस प्रकार लिखा जाएगा:
MICR कोड 9 अंकों का एक बैंकिंग कोड है, जिसका मुख्य उपयोग चेक प्रोसेसिंग (प्रक्रमण) और क्लीयरेंस (शोधन) में बैंक की शाखा की पहचान करने के लिए किया जाता है ।
इसे लेख में MICR कोड से संबंधित बहुत सारे विषयों के बारे में चर्चा की , मै आशा करता हु कि आपको यह लेख अवश्य पसंद आया होगा । लेख पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद ।
धन्यवाद ।


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